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‘जितना कीचड़ उछालोगे कमल उतना ज़्यादा खिलेगा’: राज्यसभा में पीएम मोदी

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के चल रहे बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया. राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस बुधवार को खत्म हो गई.

 

राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस सदन में जो कुछ कहा जाता है, उसे देश ध्यान से सुनता है. कुछ सांसद इस सदन को बदनाम कर रहे हैं. पीएम ने आगे कहा, यह दूर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न सिर्फ सदन को बल्कि देश को निराश करने वाली है. माननीय सदस्यों को मैं कहूंगा कि ‘कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाब… जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल’. जितना कीचड़ उछालोगे कमल उतना ज़्यादा खिलेगा.

 

पीएम ने विपक्ष पर के तंज पर जवाब देते हुए कहा, कल खड़गे जी शिकायत कर रहे थे कि मोदी जी बार-बार मेरे चुनावी क्षेत्र में आते हैं. मैं उन्हें कहना चाहता हूं मैं आता हूं वह तो आपने देखा लेकिन आप यह भी देखें कि वहां 1 करोड़ 70 लाख जनधन बैंक अकाउंट खुले हैं. सिर्फ कलबुर्गी में ही 8 लाख से ज़्यादा जनधन खाते खुले हैं. इसे देखकर उनकी(मल्लिकार्जुन खड़गे) पीड़ा मैं समझ सकता हूं. आप दलित की बात करते हैं यह भी देखें कि उसी जगह दलित को चुनाव में जीत भी मिली. अब आपको जनता ही नकार दे रही है तो आप उसका रोना यहां रो रहे हैं.

 

पीएम ने आगे कहा, कोई भी जब सरकार में आता है वह देश के लिए कुछ वादा करके आता है लेकिन सिर्फ भावनाएं व्यक्त करने से बात नहीं बनती है. विकास की गति क्या है, विकास की नीव, दिशा, प्रयास और परिणाम क्या है यह बहुत माएने रखता है.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से जनता की समस्याओं को हल करने का प्रयास कर रहे हैं. सिर्फ चाहने और कहते रहने से कुछ नहीं होता. पहले सिर्फ चाहा जाता था…जैसे गरीबी हटाओ. सर के दिखाना पड़ता है. जनता की समस्याओं को समाप्त करने के लिए हमें ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. महात्मा गांधी जी के अनुसार, हम लगातार गरीबों के लिए काम करते रहेंगे. दिन-रात खुद को खपाते रहेंगे. पहले गैस कनेक्शन के लिए लोग सांसदों के पास जाते थे. हमने 32 करोड़ परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाया. इसके लिए मेहनत करनी पड़ी. दूसरे देशों से गैस मंगाना पड़ा. मगर हमने किया. 18,000 गांवों में आजादी के साठ साल बाद तक बिजली नहीं थी. यह आदिवासियों के गांव थे. इन्होंने ध्यान नहीं दिया. हमने चुनौती को स्वीकार किया और समय-सीमा के भीतर सभी गांवों में बिजली पहुंचाई. उन गांव के लोगों का सरकार में विश्वास बढ़ा.

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में आदिवासियों का बहुत बड़ा योगदान था, लेकिन उनपर ध्यान नहीं दिया गया. अगर कांग्रेस की सरकारों ने सही तरह से काम किया होता तो आज मुझे इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पहली बार आदिवासियों के लिए मंत्रालय बनाया. 110 जिलों पर हम विशेष फोकस कर रहे हैं. हर विषय पर ध्यान दे रहे हैं. हमारी सरकार ने आदिवासियों को सात लाख पट्टे दिये. पहले की सरकारों की प्राथमिकता में आदिवासी नहीं थे.