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क्या होता है एंजल टैक्स, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरी तरह खत्म करने का किया ऐलान

क्या होता है एंजल टैक्स, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरी तरह खत्म करने का किया ऐलान

 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत मंगलवार को संसद में केंद्रीय बजट 2024-25 पेश किया। यह बजट मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सभी सेक्टर के लिए कई बड़े एलान किये। इसी में से एक ऐलान एंजेल टैक्स को लेकर हुआ है, जिसमें उन्होंने एंजल टैक्स को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। तो क्या होता है यह एंजल टैक्स? और इसे हटाने से आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा?  आइये जानते हैं।

क्या है एंजेल टैक्स

यह कर व्यवस्था उन नव व्यापारियों पर लागू होती थी जो एंजेल निवेशको से फंडिंग हासिल करते थे। आसान भाषा में समझें तो जब कोई स्टार्टअप किसी एंजेल निवेशक से फंड लेता था तो वह इस पर भी टैक्स चुकाता था। अपनी फेयर वैल्यू से जितनी अधिक राशि स्टार्टअप किसी एंजल निवेशक से जुटाता है, उस पर एंजल टैक्स वसूला जाता है। इसे ऐसे समझे जैसे, यदि किसी स्टार्टअप की फेयर वैल्यू एक करोड़ है और वह 1.5 करोड़ रुपये एंजल निवेशकों से जुटाता है तो 50 लाख रुपये पर एंजल टैक्स लगेगा। यह सारी प्रक्रिया आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 (2) (vii) (b) के तहत होती थी।

 सरकार ने कब और क्यों लागू की यह टैक्स व्यवस्था  

एंजेल टैक्स को देश में साल 2012 में लागू किया गया था। इस कर व्यवस्था को लागू करने के पीछे का सरकार का यह तर्क था कि इसके जरिए वह मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगा सकती है। इसके साथ ही सरकार का यह भी मानना था कि इस टैक्स की मदद से सरकार सभी तरह के बिजनेस को टैक्स के दायरे में लाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, सरकार के इस कदम से देश के तमाम स्टार्टअप्स को नुकसान झेलना पड़ रहा था।  यही वजह थी कि इस टैक्स को खत्म करने की मांग उठ रही थी। इस टैक्स को लेकर असली दिक्कत तब होती थी जब किसी स्टार्टअप को मिलने वाला इन्वेस्टमेंट उसकी फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) से भी अधिक हो जाता था. ऐसी हालत में स्टार्टअप को 30.9 फीसदी तक टैक्स चुकाना पड़ता था।

एंजल टैक्स को खत्म करने से यह पड़ेगा फर्क 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को केंद्रीय बजट 2024-25 का ऐलान करते हुए एंजल टैक्स को भी खत्म करने की घोषणा की। इस घोषणा से स्टार्टअप्स करने वालों को लाभ होगा। दरअसल, सरकार का फोकस स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी लाना है। ऐसे में स्टार्टअप्स की बढ़ोतरी के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। बता दें, बीते कुछ वर्षों में देश में स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कई स्टार्टअप्स ऐसे भी हैं जो यूनिकॉर्न बने हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य देश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना है। इसलिए वह हर संभव प्रयास कर रही है कि स्टार्टअप्स को हर तरह की मदद की जाए।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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