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आबकारी नीति घोटाला: पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की जमानत याचिका

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आबकारी नीति घोटाला: पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की जमानत याचिका

शराब नीति अनियमितता मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ख़ारिज कर दिया है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में 336 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल साबित हुई है।

 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई छह से आठ महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर सुनवाई धीमी गति से आगे बढ़ती है तो मनीष सिसोदिया बाद में फिर से ज़मानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा, ‘हमने कहा था कि कुछ पहलू अब तक संदेहास्पद हैं, लेकिन 338 करोड़ रुपये ट्रांसफर होने का पहलू लगभग साबित हो रहा है. लिहाज़ा ज़मानत अर्जी खरिज की जा रही है. लेकिन एक और बात कहना चाहते हैं कि जांच एजेंसी ने आश्वस्त किया है कि 6 से 8 महीने में ट्रायल पूरा हो जाएगा. तो अगर तीन महीने में ऐसा लगता है कि ट्रायल की रफ़्तार धीमी है तो दोबारा से ज़मानत के लिए याचिका डाल सकते हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

गौरतलब है कि फरवरी 2023 में, दिल्ली की नई उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं के लिए सिसौदिया को आखिरी बार सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. विपक्ष द्वारा बेईमानी के आरोपों के बीच नीति को वापस ले लिया गया था. वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

सीबीआई के अनुसार, सिसोदिया ने आपराधिक साजिश में सबसे महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वह उक्त साजिश के उद्देश्यों की उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए उक्त नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में गहराई से शामिल थे.