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बांग्लादेश: प्रदर्शनकारियों के निशाने पर अब प्रधानमंत्री शेख हसीना, हिंसा में 98 लोगों की मौत

ढाका: बांग्लादेश इन दिनों आक्रोश की आग में जल रहा है वहीं बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. आरक्षण पर शुरु हुआ यह आंदोलन अब इससे आगे निकल गया है वहीं अब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री शेख हसीना से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

 

बीते कुछ दिनों में शेख हसीना सरकार और प्रदर्शनकारियों की इस टकरार में अब तक 98 लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों अन्‍य घायल हुए हैं. हैरानी की बात तो यह है कि मारे गए लोगों में ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों, पुलिस चौकियों, सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यालयों और उनके नेताओं के आवासों पर हमला किया तथा कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया. सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे पर हुए बवाल को लेकर सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी रविवार को ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के बैनर तले आयोजित ‘असहयोग कार्यक्रम’ में भाग लेने पहुंचे. अवामी लीग, छात्र लीग और जुबो लीग के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया तथा फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई.

 

बता दें कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्रालय ने रविवार शाम छह बजे से देश में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया. साथ ही सरकारी एजेंसियों ने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’, ‘मैसेंजर’, ‘व्हॉट्सऐप’ और ‘इंस्टाग्राम’ को बंद करने का आदेश दिया है.

 

इसलिए बांग्लादेश में हुई हिंसा-

दरअसल, बांग्लादेश सरकार ने सविल सेवा में अब आरक्षण प्रणाली को लागू करने का नया कानून बनाया है. जिसके चलते सिविल सेवा के आधे से अधिक पद अब आरक्षित हो चुके हैं. इसमें पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के मुक्ति संग्राम के फ्रीडम फाइटर के बच्चे भी शामिल हैं. ऐसे में बांग्लादेश के छात्र अब आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों की मांग है कि देश में कोटा प्रणाली को समाप्त करना चाहिए. छात्रों का कहना है कि इस तरह के नियमों से सरकार समर्थक समूहों के बच्चों को लाभ मिलता है.

 

बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में ऐसी होगी आरक्षण व्यवस्था- 

बांग्लादेश में आरक्षण प्रणाली के तहत 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित हैं. इनमें से 30 प्रतिशत आरक्षण साल 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए रिजर्व है. वहीं, 10 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े प्रशासनिक जिलों के लिए और 10 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण रिजर्व है. इसके अलावा पांच प्रतिशत आरक्षण जातीय अल्पसंख्यक समूहों के लिए और एक प्रतिशत दिव्यांग लोगों के लिए भी रिजर्व किया गया है.

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