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फैक्ट चेक: मनोज तिवारी के रोने का यह वीडियो हालिया दिनों का नहीं, भ्रामक दावे के साथ हो रहा है

फैक्ट चेक: मनोज तिवारी के रोने का यह वीडियो हालिया दिनों का नहीं, भ्रामक दावे के साथ हो रहा है

 

लोकसभा चुनावों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी अपनी कार में यात्रा के दौरान एक पत्रकार से बातचीत करते हुए नजर आरहे हैं, बातचीत के दौरान उन्हें रोते हुए भी देखा जा सकता है।  इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर इसे हालिया दिनों का बताया जा रहा है।  इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मनोज तिवारी पीएम मोदी की नकल करने के लिए रो रहे हैं।

फेसबुक पर वायरल वीडियो को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि मोदीजी का असर तिवारीजी पर पड़ा है या इमोशनल एक्टिंग दोनों ने एक जगह से ही सीखी है?

फेसबुक के वायरल पोस्ट का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

 

फैक्ट चेक-

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल के दौरान हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि सालों पुराना है।

वायरल वीडियो हमें देखने में पुराना लगा इसके लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने वायरल वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया। खोज के दौरान वायरल वीडियो DZero नामक यूट्यूब चैनल पर मिला, जिसे फ़रवरी 19, 2020 को अपलोड किया गया था।

वीडियो में दी गयी कैप्शन के मुताबिक वायरल वीडियो दिल्ली के विधानसभा चुनाव का है। जहां आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड सीटों से जीत हांसिल की थी।

इसी जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर और बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो टीवी 9 के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर इस मामले का पूरा वीडियो मिला। जिसे जनवरी 14, 2020 को अपलोड किया गया था। प्राप्त यूट्यूब वीडियो को 13 मिनट 50 सेकंड तक देखने पर हमें वायरल वीडियो वाला हिस्सा मिला।

वीडियो को देखने पर हमने जाना कि भाजपा नेता व सांसद मनोज तिवारी दिल्ली विधानसभा के दौरान दिल्ली के प्रभारी थे, इसलिए दिल्ली विधानसभा में हार की जिम्मेदारी अपने सर लेते हुए मीडिया कर्मी से बात कर रहे थे। इसी दौरान वह अपने जीवन के पुराने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कैमरे के सामने रो पड़े।

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2020 के दौरान का है। जिसे हालिया दिनों में शेयर किया जा रहा है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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