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फैक्ट चेक: असली नहीं है हाथ में घड़ी पहनते हुए पीएम मोदी की यह तस्वीर, जानें पूरा सच

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। यह तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। इस फोटो में वो काले रंग के कपड़े पहने हुए हैं और अपने बाएं हाथ पर घड़ी बांध रहे हैं। साथ ही, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री किसी ऐसे कमरे में खड़े हैं, जहां शीशे वाली अलमारियों में कुछ गहने वगैरह रखे दिख रहे हैं। इसी तस्वीर के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी पर आलीशान जीवन जीने का आरोप लगाया जा रहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं वैसे-वैसे पक्ष और विपक्ष में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। एक तरफ जहां बीजेपी के नेता, दिल्ली केे पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास को ‘शीशमहल’ कहकर तंज कस रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास को 2700 करोड़ का ‘राजमहल’ बता दिया है।  

फेसबुक पर वायरल तस्वीर शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “चलो रात के 9 बज गए, ये वाली घड़ी पहनने का टाइम हो गया है।राजमहल में ऐसे ही महंगे विलासिता वाले सूट-बूट, जूतों, चश्मों, कलम और बाकि भोग की चीजों के लिए अलग अलग कमरे बने हुए है। 2,700 करोड़ खर्च हो तो क्या कुछ नही हो सकता भाई।”

 

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक:

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल तस्वीर असली नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने वायरल तस्वीर को गूगल लेंस के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल तस्वीर से संबंधित कोई परिणाम नहीं मिले।

उपरोक्त सर्च में वायरल तस्वीर से संबंधित कोई जानकारी न मिलने पर हमें इसके AI जनरेटेड होने की आशंका हुई। जिसके लिए हमने वायरल तस्वीर को अलग अलग टूल में खोजना शुरू किया। सबसे पहले हमने वायरल तस्वीर की HIVE MODERATION टूल में जांच की। यहाँ वायरल तस्वीर को AI Generated बताया गया है।

 

इसके बाद पुष्टि के लिए हमने एक बार एक दूसरे टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोजे के दौरान हमने वायरल तस्वीर aiimagedetector नामक टूल पर भी जाँच की। जांच के दौरान हमें यहाँ मिले परिणामों पर भी वायरल तस्वीर के AI Generated होने की जानकारी मिली।

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल तस्वीर असली नहीं बल्कि AI जनरेटेड है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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