थाईलैंड बना दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला देश, समलैंगिक विवाह को दी कानूनी मंजूरी

थाईलैंड ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया, और दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला, जबकि एशिया का तीसरा देश बना जिसने LGBTQ+ समुदाय को विवाह समानता का अधिकार दिया। इस निर्णय के बाद, गुरुवार को बैंकॉक समेत पूरे देश में LGBTQ+ समुदाय ने खुशी मनाई और कई समलैंगिक जोड़ों ने सामूहिक विवाह समारोह में हिस्सा लिया।
LGBTQ+ समुदाय की बड़ी जीत
यह कानून LGBTQ+ समुदाय के वर्षों के संघर्ष का नतीजा है। पिछले साल थाईलैंड की संसद ने विवाह समानता अधिनियम (Marriage Equality Act) को पारित किया था, जिसे अब लागू कर दिया गया है। इस कानून के तहत समलैंगिक जोड़ों को वित्तीय, कानूनी और चिकित्सीय अधिकार मिल गए हैं। अब वे बच्चा गोद लेने और संपत्तियों में संयुक्त अधिकार प्राप्त करने में सक्षम होंगे।
इसके साथ ही, कानून में “पति” और “पत्नी” जैसे शब्दों को बदलकर “व्यक्ति” और “विवाह साथी” (Individual and Marriage Partner) कर दिया गया है ताकि विवाह संबंधी अधिकारों में पूर्ण समानता सुनिश्चित की जा सके।
समुदाय और नेताओं का स्वागत
LGBTQ+ अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए इसे दुनिया के लिए प्रेरणादायक मॉडल करार दिया। थाईलैंड के प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनवात्रा ने इसे लैंगिक विविधता और समानता की दिशा में थाई समाज की प्रगति का प्रतीक बताया।
एक समलैंगिक जोड़े ने कहा, “यह हमारे जीवन का सबसे खुशी का दिन है। अब हम कानूनी रूप से परिवार कहलाने का अधिकार रखते हैं।”
थाईलैंड एशिया में ताइवान और नेपाल के बाद समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला तीसरा देश बन गया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस सहित 31 देशों में समलैंगिक विवाह वैध है। वहीं, कई देशों जैसे ईरान, यमन और नाइजीरिया में समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध है और इसके लिए कठोर दंड, यहां तक कि मौत की सजा का प्रावधान है।





