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क्या है धारावी प्रोजेक्ट जिसके इर्द-गिर्द मंडरा रही है महाराष्ट्र की राजनीति

क्या है धारावी प्रोजेक्ट जिसके इर्द-गिर्द मंडरा रही है महाराष्ट्र की राजनीति

महाराष्ट्र में सोमवार को चुनाव प्रचार थम गया है। लेकिन इस बार महराष्ट्र चुनाव में धारावी पुनः निर्माण प्रोजेक्ट एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसे लेकर महाविकास अघाड़ी ने कहा था कि अगर वो सत्ता में आए तो अडानी ग्रुप को दिया गया धारावी प्रोजेक्ट का टेंडर रद्द कर दिया जाएगा।

धारावी प्रोजेक्ट को लेकर राहुल गांधी ने बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

गौरतलब है कि इसी प्रोजेक्ट को लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि भाजपा धारावी की जमीन को अडानी ग्रुप को बेचने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि धारावी का भविष्य खतरे में है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से धारावी के गरीबों को नुकसान होगा। यह जमीन अरबपतियों के फायदे के लिए तैयार की जा रही है। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार देश के 20-25 अमीरों के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक अरबपति को इस प्रोजेक्ट से ₹1 लाख करोड़ रुपये का लाभ होगा।

महाराष्ट्र के सीएम एक नाथ शिंदे ने दिया जवाब 

इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एक नाथ शिंदे ने कहा कि धारावी के बारे में लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है। धारावी में 2 लाख लोगों को घर मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से 2 लाख लोगों की जिंदगी बदलने वाली है। जो लोग कचरे और गंदगी में रहते हैं, पानी के बीच रहते हैं, उनकी हालत बहुत खराब है। वो अपने लोग हैं, दलित हैं, पिछड़े हैं आदिवासी हैं, सब लोग हैं। उन्हें अगर न्याय दिलाना है तो राहुल गांधी को इसकी सही जानकारी लेनी चाहिए।

विधानसभा चुनावों में धारावी प्रोजेक्ट बना बड़ा मुद्दा

चुनाव प्रचार में विपक्षी पार्टियों ने धारावी रिडेवपलमेंट प्रोजेक्ट को बड़ा मुद्दा बनाया। धारावी में कांग्रेस की ज्योति गायकवाड़ और शिवसेना (शिंदे गुट) के राजेश खंडारे का मुकाबला है। धारावी सीट पर गायकवाड़ परिवार का दबदबा रहा है। 2004 से 2019 तक यहां वर्षा गायकवाड़ जीतती आ रही थीं। इस बार उनकी बहन ज्योति यहां से चुनाव लड़ रही हैं।

क्या है धारावी? 

धारावी मुंबई में बसी झुग्गी-झोपड़ियों की एक बस्ती है, जिसे मुंबई का दिल भी कहा जाता है। अंग्रजों के काल में बसी ये बस्ती आज एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बस्ती है। इस बस्ती में कितने लोग रहते हैं? इसका सटीक आंकड़ा नहीं है। लेकिन एक अनुमान है कि यहां 6 से 10 लाख लोग रहते हैं।

धारावी में 58 हजार परिवार और करीब 12 हजार कमर्शियल कॉम्प्लेक्स हैं। 1882 में अंग्रेजों ने धारावी को बसाया था। इसे बसाने का मकसद ये था कि मजदूरों को किफायती ठिकाना दिया जा सके। धीरे-धीरे यहां लोग बसने लगे और झुग्गी-बस्तियां बन गईं। धारावी की जमीन तो सरकारी है, लेकिन यहां लोगों ने अपने खर्चे से झुग्गी-बस्ती बनाई है। यहां इतनी झुग्गी-बस्तियां हैं कि दूर से देखने पर जमीन दिखाई ही नहीं पड़ती। 550 एकड़ में फैली धारावी में एक किलोमीटर के दायरे में 2 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। धारावी में 100 वर्ग फीट की छोटी सी झुग्गी में 8 से 10 लोग एकसाथ रहते हैं। कुछ झुग्गियां तो ऐसी भी बनी हैं, जिनमें कारखाने भी हैं और घर भी। लगभग 80 फीसदी लोग पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं।

क्या है धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट?

साल 1999 में पहली धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा गया, जब महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन की सरकार थी। इसके बाद 2003-04 में महाराष्ट्र सरकार धारावी का रिडेवलपमेंट प्लान लेकर आई। धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का उद्देश्य धारावी को आधुनिक और विकसित बस्ती में बदलना है। यह योजना झोपड़ियों को स्थायी मकानों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से बदलने की है।

धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट 20 हजार करोड़ रुपये का है और इसके 17 साल में पूरा होने की उम्मीद है। जबकि यहां रहने वाले लोगों को 7 साल में पक्के घरों में बसाने का टारगेट है। इस पूरे प्रोजेक्ट में 1 करोड़ वर्ग फीट से ज्यादा की जमीन आएगी।

बता दें कि 1 जनवरी 2000 या उससे पहले यहां रहने वाले लोगों को 350 वर्ग फीट का मकान मिलेगा। 2000-2011 के बीच आने वालों को 300 वर्ग फीट का मकान मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें ₹2.5 लाख देने होंगे। 2011 के बाद रहने वालों को कोई मकान नहीं मिलेगा।

 

 

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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