उत्तराखंड बना समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला पहला राज्य

देहरादून: उत्तराखंड ने इतिहास रचते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून में UCC का नियमावली और पोर्टल लॉन्च किया। इस ऐतिहासिक कदम को राज्य में न्याय और समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, जो धर्म, जाति, लिंग या समुदाय के आधार पर भेदभाव को खत्म करता है। इसमें विवाह, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों को एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाया जाएगा। यह अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर, सम्पूर्ण उत्तराखंड राज्य, साथ ही राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के निवासियों पर लागू।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे उत्तराखंड के विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC के नियमों और पोर्टल के उद्घाटन पर कहा, “यह लोगों के लिए एक आसान रास्ता है। इसमें पोर्टल भी बनाया गया है… आज एक ऐतिहासिक दिन है… आज के दिन यह(UCC) लागू हो रहा है इसलिए प्रत्येक वर्ष इसे समान नागरिक संहिता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।”
#WATCH देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC के नियमों और पोर्टल के उद्घाटन पर कहा, “यह लोगों के लिए एक आसान रास्ता है। इसमें पोर्टल भी बनाया गया है… आज एक ऐतिहासिक दिन है… आज के दिन यह(UCC) लागू हो रहा है इसलिए प्रत्येक वर्ष इसे समान नागरिक संहिता दिवस… pic.twitter.com/uGF5HONWid
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2025
कैसे हुई शुरुआत?
- समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी, जब मुख्यमंत्री ने इसे चुनावी वादा बनाया था।
- विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसमें पूर्व न्यायधीश, समाजशास्त्री और कानूनी विशेषज्ञ शामिल थे।
- समिति ने व्यापक परामर्श के बाद एक रिपोर्ट तैयार की, जिसे अब नियमावली का रूप देकर लागू किया गया है।
UCC लागू करने की मुख्य बातें:
- सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े नियम समान होंगे।
- राज्य सरकार ने UCC को लागू करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है, जिससे नागरिकों को जानकारी और सेवाएं मिल सकेंगी।
- इस कदम का उद्देश्य राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव और कानून के प्रति विश्वास को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रीय महत्व
उत्तराखंड का यह कदम देश के अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। यह बहस छेड़ सकता है कि पूरे देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने का समय आ गया है या नहीं।





