World Sparrow Day: गौरैया संरक्षण की ओर बढ़ाएं कदम

World Sparrow Day: आज ‘विश्व गौरैया दिवस’ है एक ऐसा दिन जो हमें उस नन्हीं चिड़िया की याद दिलाता है, जो कभी हमारे घरों का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी। सुबह की पहली किरण के साथ खिड़की पर बैठकर चहचहाने वाली गौरैया अब कंक्रीट के जंगलों और मोबाइल टावरों के शोर में कहीं खो गई है।
बचपन की यादें और वर्तमान का सन्नाटा
शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके बचपन की यादों में गौरैया का बसेरा न हो। घर के दालान में बिखरे अनाज के दानों को चुगना और तिनकों से घोंसला बनाना—ये दृश्य अब दुर्लभ होते जा रहे हैं।
आज की पीढ़ी से अगर पूछा जाए कि उन्होंने आखिरी बार गौरैया कब देखी थी, तो शायद बहुतों के पास इसका जवाब न हो। यह केवल एक पक्षी की कमी नहीं है, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के बिगड़ते संतुलन का एक बड़ा संकेत है।
विलुप्ति के मुख्य कारण
वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के अनुसार, गौरैया की घटती आबादी के पीछे कई गंभीर कारण हैं। आधुनिक वास्तुकला ने सबसे बड़ा असर डाला है। पुराने घरों में छेद और आले होते थे, जहाँ गौरैया आसानी से घोंसला बना लेती थी, लेकिन आज के बंद फ्लैटों और कांच की इमारतों में उनके लिए जगह नहीं बची है।
इसके अलावा, बढ़ता प्रदूषण और मोबाइल टावरों से निकलने वाला विद्युत चुंबकीय विकिरण भी इनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, जिससे इनके प्रजनन और दिशा-ज्ञान की क्षमता प्रभावित होती है।
भोजन की कमी भी एक बड़ा कारण है। खेती में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से छोटे-छोटे कीड़े खत्म हो रहे हैं, जो गौरैया बच्चों का मुख्य आहार होते हैं।
गौरैया को बचाना केवल सरकार या संस्थाओं का काम नहीं है, बल्कि यह हम सभी की जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम इन्हें अपने आसपास फिर से ला सकते हैं।
अपनी बालकनी या छत पर मिट्टी के बर्तन में पानी और अनाज, जैसे बाजरा या चावल, रखना एक आसान और प्रभावी कदम है। यदि संभव हो, तो उनके लिए कृत्रिम घोंसले यानी लकड़ी के छोटे बक्से (nest boxes) भी लगाए जा सकते हैं।
आज इस दिवस पर आइए संकल्प लें कि हम अपने इस ‘नन्हें दोस्त’ को विलुप्त नहीं होने देंगे। क्योंकि अगर गौरैया की चहक मौन हो गई, तो प्रकृति का संगीत भी अधूरा रह जाएगा।





