विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस: पांच सफल वैश्विक मॉडल जिन्होंने रेगिस्तान को हरियाली में बदला

हर साल 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों में मरुस्थलीकरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही, यह दिन कृषि भूमि के क्षरण को रोकने और स्थायी भूमि प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने के महत्व को उजागर करता है।
इस विशेष दिवस का मुख्य लक्ष्य यह समझना और साझा करना है कि हम अपनी भूमि को खराब होने से कैसे बचा सकते हैं और उसे फिर से उपजाऊ बनाने के लिए कौन-से प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी देता है कि सूखे और भूमि क्षरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर क्या किया जा सकता है।
विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वस्थ भूमि न केवल हमारी खाद्य सुरक्षा और आजीविका के लिए जरूरी है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने और जैव विविधता को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आईए जानते हैं पांच सफल वैश्विक मॉडल, जिन्होंने रेगिस्तान को हरी भूमि में बदला
चीन का ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट
चीन का “ग्रीन वॉल” प्रोजेक्ट, जिसे थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट फॉरेस्ट प्रोग्राम कहा जाता है, 1978 में शुरू हुई एक विशाल पुनर्वनीकरण परियोजना है, जिसका उद्देश्य रेगिस्तान के फैलाव को रोकना, धूल के तूफानों को कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को घटाना है। यह परियोजना 2050 तक जारी रहेगी और 13 प्रांतों में लगभग 3.9 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी, जो चीन के कुल भूभाग का 42% है।
इस परियोजना के तहत ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाते हैं जो रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं और मिट्टी तथा पानी के कटाव को रोकने में मदद करते हैं। इसके साथ ही यह परियोजना रोजगार पैदा करती है और ग्रामीण पलायन को कम करती है। 2023 तक चीन का वन आवरण 10% से बढ़कर 25% हो गया है, और उपग्रह आंकड़े इस प्रगति की पुष्टि करते हैं। हालांकि यह एक लंबी अवधि की पहल है, लेकिन अब तक के नतीजे सकारात्मक रहे हैं और यह परियोजना चीन के पर्यावरणीय भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

इज़राइल की ड्रिप सिंचाई प्रणाली
इज़राइल ने ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी खेती को संभव बना दिया है। इस तकनीक में पानी को पाइपों और ड्रिपर्स के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और फसल की पैदावार बढ़ती है। रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी यह प्रणाली सफल रही है, क्योंकि इससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होता है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली में तीन मुख्य भाग होते हैं: पाइपलाइन, ड्रिपर्स और एक नियंत्रण इकाई, जो पानी की मात्रा और समय को नियंत्रित करती है। इस तकनीक से न केवल पानी और उर्वरकों की खपत घटती है, बल्कि किसानों की लागत भी कम होती है। साथ ही, यह प्रणाली मिट्टी के कटाव को रोकने और पर्यावरण की रक्षा में भी मदद करती है।
इज़राइल, जो लंबे समय से जल संकट से जूझता रहा है, आज इस नवाचार के कारण दुनिया के कृषि तकनीक में अग्रणी देशों में गिना जाता है। ड्रिप सिंचाई एक टिकाऊ, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल समाधान है, जो जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल
अफ्रीका की “ग्रेट ग्रीन वॉल” एक महत्वाकांक्षी और व्यापक परियोजना है, जिसका उद्देश्य सहारा रेगिस्तान के निरंतर विस्तार को रोकना और क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा देना है। यह परियोजना 8,000 किलोमीटर लंबी और 15 किलोमीटर चौड़ी पेड़ों की एक हरित दीवार तैयार करने की योजना पर आधारित है, जो पश्चिम में सेनेगल से शुरू होकर पूर्व में जिबूती तक फैलेगी। इसका मुख्य लक्ष्य मरुस्थलीकरण को रोकना, बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना और पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करना है।
इस परियोजना के माध्यम से कृषि योग्य भूमि का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय समुदायों को खाद्य सुरक्षा में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह पहल रोजगार के नए अवसर प्रदान करके गरीबी को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। वृक्षारोपण के ज़रिए कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की क्षमता बढ़ रही है, जिससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिल रही है।
ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना 11 अफ्रीकी देशों—जैसे सेनेगल, माली, नाइजर, नाइजीरिया, चाड, सूडान, इरिट्रिया, इथियोपिया, जिबूती, बुर्किना फासो और मॉरिटानिया—में लागू की जा रही है। 2007 में शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक करीब 18 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनः हरित किया गया है और लगभग 3.5 लाख नौकरियां उत्पन्न हुई हैं।

मंगोलिया का स्टेप लैंड रिस्टोरेशन मॉडल
मंगोलिया का “स्टेप लैंड रिस्टोरेशन मॉडल” एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देश के घास के मैदानों को पुनर्जीवित करना और जलवायु परिवर्तन से लड़ना है। यह मॉडल टिकाऊ चराई प्रथाओं और सामूहिक चरवाहा प्रबंधन पर आधारित है, ताकि भूमि क्षरण को रोका जा सके और पारिस्थितिक तंत्र को बहाल किया जा सके।
इस पहल के तहत चराई को संतुलित ढंग से प्रबंधित किया जाता है, जिससे घास की प्राकृतिक वृद्धि बनी रहती है। चरवाहों को मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे चराई पर बेहतर नियंत्रण रख सकें। साथ ही, पौधारोपण और जल स्रोतों के संरक्षण जैसे उपायों से पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।
घास के मैदानों को कार्बन सिंक के रूप में उपयोग कर जलवायु परिवर्तन से मुकाबला किया जा रहा है। इसके अलावा, स्थायी चराई और पर्यटन से स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर भी बढ़ रहे हैं। यह मॉडल दुनिया के उन क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण की समस्या से जूझ रहे हैं।






