मंगल लैंडिंग और शुक्र मिशन पर भी काम, इसरो प्रमुख ने बताया भविष्य का रोडमैप

भारत आने वाले वर्षों में अपने चंद्र मिशनों को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि चंद्रयान-4 मिशन के तहत चंद्रमा की सतह से नमूने इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने की योजना बनाई जा रही है। वहीं चंद्रयान-5 मिशन में भारी लैंडर और अधिक समय तक चलने वाला मिशन शामिल होगा।
बुधवार को स्टार्ट-2026 कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए नारायणन ने कहा कि अब भारत चंद्रयान कार्यक्रम को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। चंद्रयान-4 मिशन में चंद्रमा से नमूने लाकर वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा, जबकि चंद्रयान-5 मिशन पहले की तुलना में अधिक उन्नत और लंबी अवधि का होगा।
मिशन की अवधि और रोवर में होगा बड़ा बदलाव
इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान-3 मिशन की अवधि लगभग 14 दिन थी, लेकिन भविष्य के मिशनों को लगभग 100 दिन तक चलाने की योजना है। इसके साथ ही रोवर भी पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और शक्तिशाली होगा।
चंद्रयान-3 में रोवर का वजन करीब 25 किलोग्राम था, जबकि आने वाले मिशनों में रोवर का वजन लगभग 350 किलोग्राम तक हो सकता है।
शुक्र और मंगल मिशन की तैयारी
नारायणन ने बताया कि इसरो केवल चंद्र मिशनों तक ही सीमित नहीं है। एजेंसी शुक्र ग्रह के अध्ययन और मंगल ग्रह पर लैंडिंग मिशन की भी तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही मंगल ऑर्बिटर मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है और अब मंगल पर लैंडर भेजने की योजना पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं को लेकर सरकार से मंजूरी पर चर्चा जारी है।
गगनयान और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम
इसरो प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का दायरा काफी बढ़ा है। इसरो फिलहाल गगनयान मिशन पर काम कर रहा है और अगले दो वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
इसके अलावा भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और 2040 तक भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने तथा सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
चंद्रयान मिशनों की बड़ी उपलब्धियां
नारायणन ने बताया कि इसरो अब तक कई बड़े वैज्ञानिक मिशन पूरे कर चुका है। इनमें एस्ट्रोसैट उपग्रह भी शामिल है, जो पिछले दस वर्षों से अंतरिक्ष में सक्रिय है। चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 मिशनों से भी कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजें हुई हैं।
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता
साल 2023 में भारत ने चंद्रयान-3 मिशन के जरिए इतिहास रचा था। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इस मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह पर आठ प्रकार के खनिजों की पहचान की गई, भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन हुआ और सतह के तापमान के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के पास मौजूद इलेक्ट्रॉन बादलों का भी अध्ययन किया।





