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प्रवासी भारतीय सम्मान क्या है? जानिए 2025 में किन देशों के भारतीयों को मिला यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड

भारत सरकार हर दो साल में विदेशों में रह रहे भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों को उनके असाधारण योगदान के लिए प्रवासी भारतीय सम्मान (Pravasi Bharatiya Samman Award) से सम्मानित करती है। यह सम्मान उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल कर भारत का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है और साथ ही भारत व उनके निवास देश के बीच संबंधों को मजबूत किया है।

यह पुरस्कार प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas) सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाता है। चयनित सम्मानितों को यह अवॉर्ड भारत के राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से सौंपा जाता है। प्रवासी भारतीय सम्मान को विदेशों में बसे भारतीयों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।

किन क्षेत्रों में दिया जाता है प्रवासी भारतीय सम्मान

प्रवासी भारतीय सम्मान उन भारतीयों या भारतीय मूल के व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने समुदाय सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, राजनीति, सार्वजनिक सेवा, कला-संस्कृति और समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इसके अलावा, ऐसे लोग या संस्थाएं जिन्होंने संकट के समय भारतीय समुदाय की सहायता की हो या भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया हो, उन्हें भी इस सम्मान के लिए चुना जाता है।

सम्मान के लिए नामांकन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से किया जाता है और एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा अंतिम चयन किया जाता है।

2025 में कहां हुआ आयोजन

18वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2025 का आयोजन 8 से 10 जनवरी के बीच भुवनेश्वर, ओडिशा में हुआ। इस अवसर पर दुनिया भर से आए प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चुने गए व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया।

प्रवासी भारतीय सम्मान 2025

2025 में कुल 27 व्यक्तियों और संस्थाओं को यह सम्मान दिया गया। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जापान, सिंगापुर, यूएई, मॉरीशस, मलेशिया, फिजी, गुयाना और अफ्रीकी देशों तक में बसे भारतीय शामिल रहे।

ऑस्ट्रेलिया से प्रो. अजय राणे को सामुदायिक सेवा के लिए सम्मान मिला। ऑस्ट्रिया से डॉ. मारियालेना जोन फर्नांडिस को शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए चुना गया। बारबाडोस की डॉ. फिलोमेना एन मोहिनी हैरिस को चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

जापान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. लेखराज जुनेजा, सिंगापुर से शिक्षा क्षेत्र में अतुल अरविंद तेमुर्णिकर, यूएई से व्यापार क्षेत्र में रामकृष्णन शिवास्वामी अय्यर, जबकि अमेरिका से चिकित्सा और सामुदायिक सेवा में योगदान के लिए डॉ. शरद लखनपाल और डॉ. शर्मिला फोर्ड को यह सम्मान दिया गया।

ब्रिटेन से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में योगदान के लिए बैरोनेस उषा कुमारी प्रशार, मलेशिया से सार्वजनिक सेवा के लिए डॉ. सुब्रमणियम के. वी. सथासिवम, वहीं त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगलू को सार्वजनिक मामलों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

रूस, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरिबियाई देशों में सक्रिय भारतीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सामुदायिक सेवा, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किया गया।

भारत और प्रवासी भारतीयों के रिश्ते की पहचान

प्रवासी भारतीय सम्मान न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि यह भारत और वैश्विक भारतीय समुदाय के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक भी है। यह अवॉर्ड उन लाखों भारतीयों के योगदान को मान्यता देता है, जो विदेशों में रहते हुए भी भारतीय संस्कृति, मूल्यों और भारत के हितों को आगे बढ़ा रहे हैं।

संक्षेप में, प्रवासी भारतीय सम्मान भारत की उस वैश्विक सोच का प्रतीक है, जिसमें देश अपने प्रवासी नागरिकों को अपनी ताकत मानता है और उनके योगदान को खुले मंच पर सम्मान देता है।

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