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फैक्ट चेक: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जजों को लेकर हालिया दिनों में नहीं पुछा गया यह सवाल, 5 साल पुरानी खबर हो रही है वायरल

फैक्ट चेक: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जजों को लेकर हालिया दिनों में नहीं पुछा गया यह सवाल, 5 साल पुरानी खबर हो रही है वायरल

 

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट वायरल हो रही है। पोस्ट में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से संबंधित एक खबर छपी है। जहां उन्होंने न्याय पालिका में दलितों, पिछड़ों और महिला जजों की कमी को लेकर चिंता जताई है। इसी खबर को सोशल मीडिया पर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जजों की कमी को लेकर यह सवाल हालिया दिनों में पूछा है।

फेसबुक पर यह पोस्ट शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है। “पिछले 5 साल संघवाद के साथ मज़बूती के से खड़ा रहने के बाद विदाई के वक़्त दलित, ओबीसी और आदिवासी याद आए!”

 

 

फेसबुक का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक: 

फेसबुक पर वायरल हो रही इस पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले कुछ संबंधित कीवर्ड्स के माध्यम से खोजना शुरू किया। जिसके बाद हमें Inshorts नामक वेबसाइट पर मामले से संबंधित एक खबर मिली। जिसे नवंबर 26, 2017 को छापा गया था।

प्राप्त लेख से हमें जानकारी मिली कि यह खबर हालिया दिनों की नहीं बल्कि साल 2017 के दौरान की है। इसलिए पुष्टि के लिए हमने गूगल पर और बारीकी से खोजा, जिसके बाद हमें खोज के दौरान The Republic Press नामक फेसबुक पेज द्वारा नवंबर 26,2017 को किए गए एक पोस्ट में भी यही खबर मिली। प्राप्त पोस्ट से पुष्टि हुई कि यह खबर हालिया दिनों की नहीं बल्कि, साल 2017 के दौरान का है।

उपरोक्त फेसबुक पोस्ट के अतरिक्त हमें दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर भी खबर मिली। जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जजों की कमी को लेकर चिंता जाहिर की गयी थी।

 

पड़ताल के दौरान उपरोक्त प्राप्त तथ्यों से पता चला कि यह खबर हालिया दिनों की नहीं बल्कि साल 2017 के दौरान की है जिसे वर्तमान में वायरल कर भ्रम फैलाया जा रहा है।

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