लेह में हिंसक प्रदर्शन: बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने लगाई आग

लद्दाख के लेह शहर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय के बाहर हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। यह प्रदर्शन ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) की ओर से बुलाए गए बंद के दौरान हुआ। संगठन लंबे समय से राज्य का दर्जा (Statehood) और क्षेत्र को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) का दर्जा देने की मांग कर रहा है।
स्थिति को देखते हुए लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत पाबंदियां लगाई हैं। इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोगों के एक साथ जुटने पर रोक है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम शांति-व्यवस्था बनाए रखने और जन-जीवन की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार को भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर “नतीजापरक” बातचीत न करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इसी दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, जिसके बाद झड़प हो गई। पत्थरबाजी की खबरें हैं और पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई गाड़ियों में आग लगाए जाने की भी सूचना है।
लद्दाख की इन मांगों को लेकर आंदोलन चला रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को अपना तीन सप्ताह से चल रहा अनशन खत्म कर दिया। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि युवा प्रदर्शनकारियों में और गुस्सा भरे। दो साथी अनशन के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे हिंसा का रास्ता न अपनाएं और सरकार भी संवेदनशीलता दिखाए।”
वांगचुक ने गृह मंत्रालय द्वारा 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में हाई पावर्ड कमेटी (HPC) की बैठक बुलाने के ऐलान को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि लद्दाख के “लंबित” मुद्दों पर तुरंत “नतीजापरक” बातचीत होनी चाहिए। इधर, करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने भी एलएबी की मांगों के समर्थन में गुरुवार (25 सितंबर) को बंद का आह्वान किया है।
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हो रहे हैं जब अगले महीने लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) के चुनाव होने हैं। 2020 के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।





