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चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना अपराध: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना POSCO और IT एक्ट के तहत अपराध है. CJI डीवाई चंद्रजूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि यह फैसला मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए सुनाया गया है.

 

दरअसल मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर कोई चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखता या फिर डाउनलोड करता है तो यह कोई अपराध नहीं है. इसी फैसले को गलत साबित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में गंभीर गलती की है. हम इसे खारिज करते हैं और केस को वापस सेशन कोर्ट भेजते हैं.

 

वहीं इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि कोई व्यक्ति अगर अश्लील फिल्म या फोटो देख रहा है तो यह कोई अपराध नहीं साथ ही अगर वह यह किसी और को दिखा रहा है तो यह गैरकानूनी है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने केरल और मद्रास दोनों के आदेशों को खारिज कर दिया है.

 

चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

हम संसद को सुझाव देते हैं कि POSCO एक्ट में बदलाव करें और इसके बाद पोर्नोग्राफी शब्द की जगह चाइल्ड सेक्शुअली एब्यूसिव एंड एक्सप्लॉइटेटिव मैटिरियल का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए अध्यादेश भी लाया जा सकता है.

बेंच ने कहा, हमने यह फैसला चाइल्ड पोर्नोग्राफी के चलते बच्चों के उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की घटनाओं के आधार पर दिया है. ऐसे मामलों की शिकायत करने में समाज की कितनी भूमिका है. इस पर भी ध्यान रखा जाए.

 

भारत में पोर्न वीडियो देखने को लेकर कानून

  1. भारत में ऑनलाइन पोर्न देखना गैर कानूनी है, लेकिन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 में पोर्न वीडियो बनाने, पब्लिश करने और सर्कुलेट करने पर बैन है.
  2. इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के सेक्शन 67 और 67A में इस तरह के अपराध करने वालों को 3 साल की जेल के साथ 5 लाख तक जुर्माना देने का भी प्रावधान है.
  3. IPC सेक्शन-292, 293, 500, 506 में भी इससे जुड़े अपराध को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं.
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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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