अमेरिका-चीन व्यापार तनाव: रेयर अर्थ मैग्नेट्स पर टैरिफ को लेकर ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर चीन ने रेयर-अर्थ मैग्नेट्स का निर्यात रोका, तो अमेरिका उस पर भारी टैरिफ लगाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ व्यापार समझौता पहले से ही नाजुक स्थिति में है। व्हाइट हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा, “उन्हें हमें मैग्नेट्स देने होंगे, अगर उन्होंने नहीं दिए तो हम उन पर 200% टैरिफ लगाएंगे या कुछ ऐसा ही करेंगे।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि विमान के पुर्जे अमेरिका के पास एक बड़ा हथियार हैं। उन्होंने कहा, “हमने जानबूझकर बोइंग के पुर्जे नहीं दिए, जिससे उनके 200 विमान उड़ नहीं पाए, क्योंकि वे हमें मैग्नेट्स नहीं दे रहे थे।” ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बोइंग चीन को लगभग 500 विमान बेचने की डील पर काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच फिलहाल इस डील के मॉडल, प्रकार और डिलीवरी शेड्यूल को लेकर बातचीत चल रही है। यह बताता है कि विमान सौदा अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में अहम भूमिका निभा सकता है।
चीन दुनिया के लगभग 90% रेयर-अर्थ मैग्नेट्स का उत्पादन करता है और इनके लिए जरूरी खनिजों की रिफाइनिंग में भी उसकी बड़ी पकड़ है। ये मैग्नेट्स ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए बेहद जरूरी हैं, जिससे अमेरिका काफी हद तक चीन पर निर्भर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने के बाद अब चीन का रेयर-अर्थ मैग्नेट्स का निर्यात फिर से पहले के स्तर पर लौट आया है। जून में अमेरिका को भेजे गए मैग्नेट्स की सप्लाई 660% यानी सात गुना बढ़ी, जबकि जुलाई में इसमें 76% की बढ़ोतरी हुई।
बीजिंग स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन के फाउंडर हेनरी वांग ने कहा कि ट्रंप के बयान ज्यादा सख्त दिखने की कोशिश हैं, लेकिन असलियत में यह समझौते की ओर बढ़ने का संकेत है। “वह हमेशा बड़ी बातें करते हैं, टैरिफ की धमकी देते हैं, लेकिन हमें इन बयानों में ज्यादा उलझना नहीं चाहिए। असली चुनौती यह है कि दोनों देश समझौते को लागू करें।”
जून में दोनों देशों ने एक फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी, जिसमें चीन के रेयर-अर्थ एक्सपोर्ट पर लगी रोक को आसान करना और अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर लगी कुछ पाबंदियों को हटाना शामिल था। इसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामान पर टैरिफ घटाकर अमेरिका की ओर से 55% और चीन की ओर से 32% करने पर सहमति जताई थी। यह अस्थायी समझौता नवंबर के मध्य तक लागू है।





