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UGC के नए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जल्द सुनवाई के संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने’ से जुड़े नियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने पर विचार करने की सहमति जताई है। ये नियम देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से बनाए गए हैं, लेकिन इन्हें लेकर विवाद भी बढ़ता जा रहा है।

यह मामला उस समय सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी राहुल देवान की ओर से वकील पार्थ यादव ने याचिका का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष किया। वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की तुरंत सुनवाई की जाए, क्योंकि इन नियमों के लागू होने से भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है और इस पर न्यायिक जांच जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस अनुरोध पर कहा कि याचिका में मौजूद तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद इसे जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार किया जाएगा।

राहुल देवान की याचिका उन कम से कम तीन याचिकाओं में से एक है, जो UGC के 2026 के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। UGC ने ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए थे, जो वर्ष 2012 के पुराने नियमों की जगह लाए गए हैं। इससे पहले एक याचिका बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता मृत्युंजय तिवारी ने दाखिल की थी, जबकि दूसरी याचिका मंगलवार को वकील विनीत जिंदल ने दायर की।

UGC के नए नियमों के तहत विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और डीम्ड संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर और इक्विटी कमेटियों का गठन अनिवार्य किया गया है। इनका उद्देश्य भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करना और कैंपस में समावेशी माहौल को बढ़ावा देना है। ये नियम अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद तैयार किए गए थे, जिसमें उच्च शिक्षा में भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की मांग की गई थी।

हालांकि, जहां हाशिए पर रहने वाले छात्र समूहों ने इन नियमों का स्वागत किया है, वहीं कई उच्च जाति संगठनों और छात्रों ने इसका विरोध किया है। उनका आरोप है कि नियम स्पष्ट नहीं हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है। इसी के विरोध में मंगलवार को कुछ छात्रों ने दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया और नियमों को वापस लेने की मांग की।

अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सुनवाई तय हो सकती है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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