गाज़ा संकट पर ट्रंप का अल्टीमेटम: हमास ने नहीं मानी शर्तें तो होगी कड़ी कार्रवाई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास को एक सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे गाज़ा शांति समझौते को स्वीकार करने के लिए तीन से चार दिन का समय दिया जा रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर हमास इस प्रस्ताव को नहीं मानता, तो इसका अंजाम बहुत दुखद हो सकता है। यह शांति योजना अमेरिका की ओर से पेश की गई है, जिसे इज़राइल पहले ही स्वीकार कर चुका है, और अब अमेरिका हमास से उम्मीद कर रहा है कि वह भी इसे मान ले।
यह शांति समझौता हमास के लिए आसान नहीं है, क्योंकि इसके तहत संगठन को अपने हथियार छोड़ने, सभी इसरायली बंधकों को रिहा करने, और गाज़ा पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण छोड़ने की शर्तें रखी गई हैं। हमास अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा है, लेकिन उसका कहना है कि वह इस पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव हमास को बिलकुल भी मंजूर नहीं है, क्योंकि इसे वे इज़राइल के पक्ष में पूरी तरह झुका हुआ मानते हैं और इसे असंभव शर्तों वाला करार दे रहे हैं।
ट्रंप ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब सारी निगाहें हमास पर हैं। उन्होंने कहा, “हम बस हमास के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं। अगर वे नहीं माने, तो इसका अंत बहुत दुखद होगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समझौते पर बातचीत की गुंजाइश है, तो उन्होंने साफ कहा, “बहुत ज्यादा नहीं।” इसी दिन इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी कि अगर हमास समझौता नहीं मानता, तो “इज़राइल अपना काम पूरा करेगा।”
इस बीच, अमेरिका और इज़राइल का दबाव बढ़ने के साथ-साथ हमास पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और मिस्र जैसे प्रमुख अरब देशों ने इस योजना का समर्थन किया है। ऐसे में हमास के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई है और उसने इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से दोहा हमले के लिए माफी की मांग की थी, जिसे नेतन्याहू ने हाल ही में मान लिया है। इससे हमास के फैसले की दिशा में थोड़ी नरमी आ सकती है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर हमास इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो गाज़ा में बंधक बनाए गए 48 इसरायली नागरिकों को 72 घंटों के भीतर रिहा किया जा सकता है। यह शांति प्रयास उस भयावह हमले के बाद हो रहा है जो 7 अक्टूबर 2023 को हुआ था, जब हमास के आतंकियों ने इज़राइल पर हमला कर 1,200 लोगों की हत्या कर दी थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया था। इसके बाद शुरू हुई इज़राइली सैन्य कार्रवाई में अब तक 66,000 से ज्यादा लोग गाज़ा में मारे जा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि हमास अमेरिका और अरब देशों के दबाव में आकर समझौते को मानता है या नहीं। ट्रंप की चेतावनी के साथ ही यह मामला एक नाजुक मोड़ पर आ गया है, जहां एक तरफ शांति की संभावना है और दूसरी तरफ और अधिक रक्तपात की आशंका।





