ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: H-1B वीजा की फीस अब $100,000

ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा नियमों में किए गए बड़े बदलाव को लेकर अमेरिकी कंपनियों और विदेशी पेशेवरों में खलबली मच गई है। नए नियम के तहत, H-1B वीजा के लिए कंपनियों को अब हर एक आवेदन पर $100,000 (लगभग 83 लाख रुपये) चुकाने होंगे, जबकि पहले यह फीस केवल $2,000 से $5,000 तक होती थी।
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 20 सितंबर को एक बयान जारी कर इस कदम पर गंभीर चिंता जताई। चैंबर ने कहा कि वह सरकार से बातचीत कर रहा है ताकि इस फैसले के असर को कम किया जा सके। बयान में कहा गया, “हमें कर्मचारियों, उनके परिवारों और कंपनियों पर पड़ने वाले असर की चिंता है। हम अपने सदस्यों और सरकार के साथ मिलकर इसके प्रभाव को समझने और आगे का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”
यह नया नियम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए लागू किया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर तकनीकी और आईटी सेक्टर पर पड़ा है, जहां विदेशी पेशेवरों की बड़ी मांग होती है। H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करती हैं, खासकर आईटी, इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्रों में। हर साल अमेरिका 65,000 H-1B वीजा जारी करता है, और अतिरिक्त 20,000 वीजा अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए आरक्षित होते हैं।
फीस में अचानक आई इस भारी बढ़ोतरी से हजारों भारतीय वीजा धारकों और आवेदकों में घबराहट फैल गई है। कई लोगों ने अपनी उड़ानें रद्द कर दीं या अमेरिका में वापसी के लिए जल्दी रवाना हो गए, क्योंकि उन्हें डर है कि यह नियम उनके वीजा स्टेटस या अमेरिका में दोबारा प्रवेश को प्रभावित कर सकता है। इमिग्रेशन वकीलों और कंपनियों ने विदेशों में रह रहे वीजा धारकों और उनके परिवारों को तुरंत अमेरिका लौटने की सलाह दी है।
भारत और चीन जैसे देशों से सबसे ज्यादा H-1B टैलेंट आता है, इसलिए इस नियम से अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिभा लाना और बनाए रखना और भी महंगा और मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश में लगा हुआ है, ताकि इस ‘बड़ी बाधा’ से कंपनियों और कर्मचारियों को राहत मिल सके।





