SCO समिट के बाद ट्रंप भड़के – अमेरिका ने भारत को खो दिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। यह बयान तब आया जब हाल ही में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुलाकात की।
ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “लगता है हमने भारत और रूस को चीन को खो दिया है। आशा है इनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो।” यह ट्रंप का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक बयान माना जा रहा है, जो भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ते करीबी रिश्तों को लेकर है।
इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। तीनों देशों के अमेरिका से रिश्ते हाल के वर्षों में कई मुद्दों पर खटास भरे रहे हैं, जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार नीति और क्षेत्रीय प्रभाव।
अमेरिका लंबे समय से भारत को चीन का विकल्प मानता आया है और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में निवेश करता रहा है। ट्रंप के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए थे। 2019 में उन्होंने पीएम मोदी के साथ Howdy Modi कार्यक्रम में हिस्सा लिया और जापान व ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड (QUAD) समूह को भी मजबूत किया।
लेकिन हाल के सालों में रिश्तों में ठंडक आई है। विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की टैरिफ नीतियां और भारत के रूस से ऊर्जा आयात पर उनकी आलोचना ने रिश्तों में दूरी पैदा की। दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने भारतीय सामान पर 50% तक टैरिफ और रूसी कच्चे तेल के आयात पर 25% लेवी लगा दी।
इस बीच, पीएम मोदी का सात साल बाद चीन का दौरा अहम माना जा रहा है, क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। मोदी का यह कदम बताता है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है और किसी एक ब्लॉक के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ना चाहता।
ट्रंप का कहना है कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार से ज्यादा फायदा होता है। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ बहुत कम व्यापार करते हैं, लेकिन भारत हमसे बहुत ज्यादा व्यापार करता है। इसके अलावा, भारत ज्यादातर तेल और सैन्य सामान रूस से खरीदता है, अमेरिका से बहुत कम।”
ऊर्जा व्यापार अब भी विवाद का मुद्दा है। ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह सस्ते तेल की खरीद के जरिए रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद कर रहा है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि अमेरिका चीन और यूरोपीय देशों को लेकर ऐसा रवैया नहीं अपनाता, जबकि वे भी रूसी ऊर्जा खरीदते हैं।





