ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले पर लगाई रोक, जानें क्या है मामला

दुनियाभर के स्टूडेंट्स के बीच काफी लोकप्रिय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अब स्टूडेंट्स एडमिशन नहीं ले पाएंगे. इसके पीछे का कारण है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच चल रहा तनाव. दरअसल, ट्रंप सरकार ने विदेशी स्टूडेंट्स के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन पर रोक लगवा दी है.
आंतरिक सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की सचिव क्रिस्टी नोएम ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक पत्र भेजा है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने उसी के हवाले से यह जानकारी दी है. नोएम ने पत्र में लिखा- मैं आपको सूचित करना चाहती हूं हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स और शैक्षणिक आदान-प्रदान के एडमिशन कार्यक्रम का सर्टिफिकेशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है.
एक्शन क्यों लिया गया है?
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने इस संबंध में एक लेटर जारी किया है. इसमें सरकार कहा है कि कैंपस में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के संबंध में जानकारी के लिए अमेरिकी सरकार के अनुरोध किया था लेकिन हार्वर्ड उसको पूरा करने में विफल रहा. विशेष रूप से, यूनिवर्सिटी पर कैंपस में विरोध प्रदर्शनों से संबंधित अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और ऑडियो-विजुअल डॉक्यूमेंट प्रस्तुत नहीं करने का आरोप लगाया गया है. आरोप लगाया गया है कि इनमें से कुछ विरोध प्रदर्शन में कथित तौर पर हमास समर्थक भावनाओं को बढ़ाया गया और इजरायल की आलोचना की गई. क्रिस्टी नोएम ने हार्वर्ड की विविधता, समानता और समावेशन (DEI) नीतियों की भी आलोचना की, उन्हें “नस्लवादी” और “यहूदी छात्रों के प्रति शत्रुतापूर्ण” कहा.
This administration is holding Harvard accountable for fostering violence, antisemitism, and coordinating with the Chinese Communist Party on its campus.
It is a privilege, not a right, for universities to enroll foreign students and benefit from their higher tuition payments… pic.twitter.com/12hJWd1J86
— Secretary Kristi Noem (@Sec_Noem) May 22, 2025
ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड को मांगे गए डॉक्यूमेंट तैयार करने और अन्य मांगों को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है. अगर उसे अपनी SEVP स्थिति बहाल करने की उम्मीद जगाए रखनी है तो यह करना होगा.
हार्वर्ड में भारतीय स्टूडेंट की संख्या
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट का यह निर्णय सीधे तौर पर हार्वर्ड के लगभग 6,800 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के भविष्य को खतरे में डालता है, जिसमें भारत के लगभग 800 छात्र भी शामिल हैं.
हार्वर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, इसके विभिन्न स्कूलों और विभागों में हर साल 500 से 800 भारतीय छात्र और विद्वान एडमिशन लेते हैं. लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, 788 भारतीय छात्र वर्तमान में हार्वर्ड में पढ़ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रेजुएशन स्तर के प्रोग्राम्स में हैं.
ट्रंप और हार्वर्ड के पीछे का तनाव
ट्रंप सरकार ने अमेरिका की तमाम यूनिवर्सिटी से कहा कि वो अपने कैंपस में फिलीस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शनों को सीमित करे और विविधता, समानता और समावेशन नीतियों को खत्म करे. लेकिन हार्वर्ड ट्रंप सरकार की इन मांगों का पालन करने से इनकार करने वाला पहला विशिष्ट कॉलेज बन गया. इसके बाद ट्रंप प्रशासन हार्वर्ड के खिलाफ एक से बढ़कर एक कार्रवाइयों में व्यस्त हो गया. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ सहित तमाम फेडरल एजेंसियों ने हार्वर्ड को दी जाने वाली अपनी अनुदान राशि में कटौती कर दी है. हार्वर्ड ने फंडिंग पर रोक को समाप्त करने की मांग करते हुए प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है.
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