‘सरकार ने हमें भगवान भरोसे छोड़ा’: प्रियंका गांधी का संसद में बड़ा आरोप

संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। लोकसभा में अपने पहले भाषण में उन्होंने आतंकियों द्वारा किए गए हमले की पृष्ठभूमि, शहीदों के परिवारों का दर्द और सरकार की कथित विफलता पर विस्तार से बात की।
प्रियंका गांधी ने शुरुआत में कहा कि वह देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सभी सैनिकों को नमन करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी अहिंसा से जरूर मिली, लेकिन उसे कायम रखने में सेना की अहम भूमिका रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में जब 26 नागरिकों को खुलेआम मारा गया, तो सरकार उस वक्त क्या कर रही थी?
प्रियंका ने कहा कि कश्मीर को लेकर सरकार लगातार शांति का दावा करती रही, लेकिन हकीकत कुछ और थी। उन्होंने कानपुर निवासी शुभम द्विवेदी का जिक्र किया, जो अपनी पत्नी के साथ बैसारण घाटी घूमने गए थे। वहां आतंकी जंगल से निकल कर आए और शुभम को उनकी पत्नी के सामने गोली मार दी। प्रियंका ने कहा कि उसकी पत्नी ने कहा, “मैंने अपनी दुनिया को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखा। वहां एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं था।”
प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछा कि जब हजारों लोग घाटी में जाते हैं, तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम क्यों नहीं थे? उन्होंने ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ का जिक्र करते हुए कहा कि ये संगठन कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है, लेकिन इसे आतंकी संगठन घोषित करने में सरकार को वर्षों लग गए। उन्होंने पूछा, “क्या किसी ने इस्तीफा दिया? क्या गृह मंत्री ने जिम्मेदारी ली?”
प्रियंका ने कहा कि सेना पर देश को गर्व है और विपक्ष हमेशा सुरक्षा बलों के साथ खड़ा है, लेकिन सरकार सिर्फ श्रेय लेना चाहती है, जिम्मेदारी नहीं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ओलंपिक मेडल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक का श्रेय लेते हैं, लेकिन जब बात जवाबदेही की आती है तो चुप्पी साध लेते हैं।”
प्रियंका गांधी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जंग शुरू हुई और अचानक रुक गई, लेकिन इसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति से मिली, न कि भारत सरकार या सेना से। उन्होंने सवाल किया कि “अगर दुश्मन पीछे हट रहा था तो हमने उसे शरण क्यों दी?” उन्होंने सरकार की कूटनीति पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि पाकिस्तानी जनरल अमेरिका में ट्रंप के साथ बैठकर लंच कर रहे थे।
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि इस सदन के सभी नेताओं को सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन बैसारण घाटी में मौजूद नागरिकों के लिए कोई सुरक्षा नहीं थी। उन्होंने कहा, “26 परिवार उस दिन उजड़ गए। उनमें से 25 लोग भारतीय थे। सरकार ऑपरेशन करके खुद को सही साबित करना चाहती है, लेकिन इन परिवारों के दर्द से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।”





