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“संविधान हमारे देश का सबसे पवित्र ग्रंथ है”, संविधान के 75 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति का संबोधन

भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने का यह 75वां वर्ष है. मंगलवार को संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे हुए हैं. इस अवसर पर संविधान दिवस का विशेष कार्यक्रम संविधान सदन में आयोजित किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान सदन में भारत के संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक डाक जारी किया साथ ही उन्होंने 75 रुपए का एक विशेष सिक्का भी जारी किया.

संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, “पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं. गरीबों को अपना घर मिल रहा है और देश में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है.. उन्होंने आगे कहा, हमारा संविधान एक जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज़ है. अपने संविधान के माध्यम से हमने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लक्ष्य हासिल किए हैं…”

 

राष्ट्रपति ने मंगलवार 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि संविधान हमारे देश का सबसे पवित्र ग्रंथ है. आज हम सब इस ऐतिहासिक अवसर के भागीदार बने हैं और साक्षी भी बने हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि 75 वर्ष पहले संविधान सदन के इसी केंद्रीय कक्ष में आज ही के दिन संविधान सभा ने नव स्वाधीन देश के लिए संविधान निर्माण का बहुत बड़ा कार्य संपन्न किया था. राष्ट्रपति ने कहा कि उस दिन संविधान सभा के माध्यम से हम भारत के लोगों ने अपने इस संविधान को अपनाया था. हमारा संविधान हमारे व्यक्तिगत और सामूहिक स्वाभिमान को सुनिश्चित करता है.

 

गौरतलब है कि सोमवार 25 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र प्रारंभ हुआ है. राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक यह सत्र अगले माह 20 दिसंबर तक चलेगा. सत्र के दूसरे दिन यानी 26 नवंबर को संविधानन दिवस मनाने के लिए दोनों सत्रों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी.

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