केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को दी औपचारिक मंजूरी, 18 माह में आएगी रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने मंगलवार को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की टर्म्स ऑफ रेफ़रेंस यानी ToR को मंजूरी दे दी। इस फैसले से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स की उम्मीदों को एक नई रफ्तार मिल गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंप देगा। सरकार ने जनवरी में ही इस आयोग के गठन को मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब ToR जारी होने के बाद इसे औपचारिक रूप से काम शुरू माना जा रहा है।
आयोग एक अस्थायी यानी टेम्पररी बॉडी होगी, जिसमें जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। उनके साथ प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन को समिति में शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि ToR तैयार करते समय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कर्मचारियों के संगठनों से सलाह ली गई है। आयोग का मुख्य कार्य सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन और भत्तों में बदलाव की सिफारिश करना होगा। ज़रूरत पड़ने पर आयोग अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को दे सकता है।
भारत में हर 10 साल में पे कमीशन गठित करने की परंपरा रही है। पिछला यानी 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बनाया गया था और 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। अब उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नया वेतनमान तभी लागू होगा जब आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपे और उस पर सरकार अंतिम मंजूरी दे दे। कर्मचारियों की यूनियनों की यह कई साल पुरानी मांग रही है, इसलिए इस अपडेट के बाद उनके बीच उत्साह का माहौल है।
रिपोर्ट तैयार करते समय आयोग अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और फिस्कल डिसिप्लिन को ध्यान में रखेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी खर्च अनियंत्रित न हो और विकास एवं सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए संसाधनों की कमी न पड़े। साथ ही, केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी की तुलना पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और प्राइवेट सेक्टर से भी की जाएगी। इस बात पर भी गौर किया जाएगा कि राज्यों की आर्थिक क्षमता पर इस सिफारिश का क्या असर पड़ेगा, क्योंकि कई बार राज्य भी केंद्र की सिफारिशों का पालन करते हैं।
इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने रबी सीजन की फसल के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी स्कीम को भी मंजूरी दी है। इसके तहत किसानों को 37,952 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी, जिससे खाद के बढ़ते खर्च से उन्हें राहत मिलेगी। वेतन आयोग और किसान सब्सिडी से जुड़े इन फैसलों को सरकार के बड़े प्री-पॉलिसी कदम के रूप में देखा जा रहा है।





