भारत

सीमा पार सक्रिय आतंकी केंद्रों पर सेना की कड़ी निगरानी, किसी भी उकसावे का मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सीमा पार स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों पर भारतीय सुरक्षा बलों की पैनी नजर बनी हुई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इन ठिकानों से यदि कोई भी आक्रामक गतिविधि सामने आती है, तो भारत पुनः निर्णायक कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगा.

सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय हैं आठ प्रशिक्षण केंद्र

सेना प्रमुख ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में आठ आतंकी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय अवस्था में चल रहे हैं. इनमें से दो अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित हैं, जबकि शेष छह नियंत्रण रेखा के आसपास संचालित हो रहे हैं. खुफिया सूचनाओं के आधार पर इन केंद्रों में लगभग 100 से 150 आतंकवादियों के मौजूद होने का अनुमान लगाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां इन सभी स्थानों पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.

सांबा-राजौरी में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन दिखने पर बोले जनरल द्विवेदी

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “जहां तक ​​ड्रोन का सवाल है… हमने जो ड्रोन देखे हैं, वे बहुत छोटे ड्रोन हैं. वे अपनी लाइट जलाकर आते हैं. वे बहुत ज़्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ते हैं, और उन्हें बहुत कम देखा गया है. 10 जनवरी को लगभग 6 ड्रोन देखे गए थे, और 11 और 12 जनवरी को 2 से 3 ड्रोन देखे गए थे. मेरा मानना ​​है कि ये डिफेंसिव ड्रोन थे, जो यह देखने की कोशिश कर रहे थे कि क्या हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है. हो सकता है कि वे यह भी देखना चाहते हों कि भारतीय सेना में कोई कमी या ढिलाई तो नहीं है, कोई ऐसी जगह तो नहीं है जहां से वे आतंकवादियों को भेज सकें. तो, मुझे लगता है कि उन्हें नेगेटिव जवाब मिला होगा. उन्होंने देखा होगा कि आज की तारीख में ऐसी कोई जगह नहीं है, ऐसी कोई कमी नहीं है जहां से वे उन्हें भेज सकें. लेकिन यह पक्का है. आज हमारी DGMO (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) से बात हुई. उस बातचीत में इस मामले पर चर्चा हुई, और उन्हें बताया गया कि यह हमें मंज़ूर नहीं है, और कृपया इसे रोकें. यह बात उन्हें बता दी गई है…”

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी, सेना पूर्ण सतर्कता पर

जनरल द्विवेदी ने साफ शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी चालू है और सशस्त्र बल हर संभावित खतरे के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि यदि इन आतंकी अड्डों से किसी प्रकार की भड़काऊ हरकत की गई, तो भारतीय सेना दोबारा सख्त प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगी.

तनाव कम होने के बाद घटाई गई अग्रिम तैनाती

महानिदेशक सैन्य अभियान (डीजीएमओ) स्तर पर हुई वार्ता में यह निर्णय लिया गया था कि दोनों पक्षों की सेनाएं अपनी अग्रिम सैन्य तैनाती में कमी लाएंगी. संघर्ष के दौरान जो सैन्य गतिविधियां बढ़ाई गई थीं, उन्हें अब निर्धारित स्थानों पर वापस भेज दिया गया है. इससे सीमावर्ती इलाकों में तनाव में कुछ कमी आई है.

परमाणु मुद्दा सैन्य वार्ता का हिस्सा नहीं

थल सेनाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत में परमाणु हथियारों से जुड़ा कोई मुद्दा शामिल नहीं था. उन्होंने कहा कि इस विषय पर जो भी बयान सार्वजनिक रूप से आए, वे राजनीतिक हस्तियों या सार्वजनिक मंचों से दिए गए थे. सैन्य स्तर पर ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई.

नई रणनीतिक क्षमता का सफल प्रदर्शन

जनरल द्विवेदी ने बताया कि इस बार भारत ने परंपरागत और परमाणु युद्ध के बीच की सैन्य क्षमता का उपयोग करते हुए पाकिस्तान के विरुद्ध अभियान चलाया. यह पहली बार था जब इस तरह की रणनीति अपनाई गई, जिससे यह संदेश स्पष्ट हो गया कि भारत प्रत्येक स्तर पर प्रभावी प्रत्युत्तर देने में सक्षम है.

ऑपरेशन सिंदूर में मिली बड़ी सफलता

सेना प्रमुख के अनुसार, 7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में कुल नौ लक्ष्यों में से सात को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. यह सैन्य अभियान 10 मई तक चला और इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है. सुरक्षा बलों की मजबूत उपस्थिति और सतर्कता के चलते क्षेत्र में शांति बनाए रखने में सफलता मिली है.

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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