Switzerland का बड़ा कदम: नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया हो सकता है प्रतिबंधित

डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है। हाल ही में आए एक सर्वे के अनुसार, स्विट्जरलैंड में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के नियमों को सख्त बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। स्विट्जरलैंड की आंतरिक मंत्री एलिजाबेथ बॉम-श्नाइडर ने संकेत दिए हैं कि सरकार युवाओं के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े कदमों पर विचार करने के लिए तैयार है।
सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े
पोलिंग फर्म GfS Bern द्वारा किए गए इस अध्ययन में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:
• 94% उत्तरदाताओं का मानना है कि नाबालिगों को सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
• 78% लोगों का मानना है कि बड़ी टेक कंपनियों (Big Tech) का युवाओं के जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव है।
यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की सरकारें मेटा (Meta) और अल्फाबेट (Google) जैसी दिग्गज कंपनियों की जांच कर रही हैं।
ग्लोबल कॉन्टेक्स्ट: टेक कंपनियों पर कसता शिकंजा
केवल स्विट्जरलैंड ही नहीं, बल्कि अमेरिका में भी स्थिति गंभीर है। पिछले बुधवार को लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने मेटा और गूगल को युवाओं के लिए हानिकारक प्लेटफॉर्म डिजाइन करने का दोषी पाया। यह फैसला भविष्य में आने वाले कई समान कानूनी मामलों के लिए एक नजीर (bellwether) साबित हो सकता है।
भारत के लिए क्या है सबक?
भारत में वर्तमान में दो समानांतर कंटेंट ब्लॉकिंग सिस्टम काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी देशों में उठ रहे ये कदम भारत जैसे बड़े बाजार के लिए भी भविष्य की रूपरेखा तय कर सकते हैं, जहां बच्चों के बीच स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ता असंतोष यह स्पष्ट करता है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे।





