लपटों से घिरा सोनमर्ग का बाज़ार

शनिवार की शाम सोनमर्ग के बाजार में अचानक अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार, धुएं के घने बादल और आग की लपटें आसमान को छूने लगीं। देखते ही देखते एक होटल आग के शोले में तब्दील हो गया। दुकानों की खिड़कियां चटकने लगीं, छतें जलने लगीं और लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि उसे काबू में लाने के लिए छह और गाड़ियों को बुलाना पड़ा। आग की तेज़ लपटों के बीच फायर ब्रिगेड कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर हालात पर काबू पाने में जुटे रहे। बाजार में मौजूद लोग घबराए हुए थे—कुछ अपनी दुकानों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तो कुछ होटल में मौजूद लोगों की सलामती के लिए दुआ कर रहे थे।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि होटल में कितने लोग मौजूद थे और इस घटना में किसी की जान गई है या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में डर का माहौल बना हुआ है, जबकि दमकल विभाग ने आग पर नियंत्रण पाने के बाद खुलासा किया कि बाजार में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं के प्रभारी गुलाम हसन ने कहा, “अगर दुकानों और रेस्टोरेंट्स में आग बुझाने के उपकरण होते, तो शायद नुकसान कम हो सकता था। प्रशासन लंबे समय से इसे लगाने के लिए कह रहा था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”
घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा,
“सोनमर्ग बाजार में विनाशकारी आग की घटना से गहरा दुख हुआ। मेरा कार्यालय स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है ताकि जरूरतमंदों तक हरसंभव सहायता पहुंच सके। मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के साथ हैं।”
इस घटना ने एक बार फिर आग से बचाव की तैयारियों और बाजारों में सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर कर दिया है। अब प्रशासन इसकी जांच कर रहा है कि आग कैसे लगी और इससे बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। लेकिन जिनका सब कुछ जलकर राख हो गया, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया है।





