ट्रंप के टैरिफ फैसले पर सौरभ शुक्ला की प्रतिक्रिया – निराशाजनक, लेकिन हल संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया कि भारत से आने वाले सामानों पर अब 25% टैरिफ यानी सीमा शुल्क लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने एक अतिरिक्त “पेनल्टी” यानी जुर्माना भी लगाने की बात कही है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम भारत के ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और रूस के साथ बढ़ते ऊर्जा व रक्षा संबंधों के चलते उठाया गया है।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यूज़ मोबाइल के एडिटर-इन-चीफ सौरभ शुक्ला ने इसे “निराशाजनक” जरूर बताया, लेकिन भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रिश्तों के चलते इस मसले को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने राष्ट्रपति ट्रंप को कई सालों तक कवर किया है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते रहे हैं। जब मोदी अमेरिका गए थे, तो उन्हें व्हाइट हाउस में रेड कार्पेट स्वागत मिला था। ट्रंप की यही रणनीति है – वह टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक आज़ादी को प्राथमिकता दी है।”
सौरभ शुक्ला ने यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे केवल राजनयिकों से नहीं सुलझते, इसमें नेताओं को खुद हस्तक्षेप करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “कई बार यह सिर्फ अफसरों के बस की बात नहीं होती, इसमें नेताओं को खुद सामने आकर बात करनी पड़ती है। मुझे पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी ट्रंप से सीधे बात करके इस विवाद को सुलझा सकते हैं।” यह फैसला उस समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और व्यापार साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। खास बात यह है कि ट्रंप ने अपने बयान में भारत और रूस के बीच तेल कारोबार का ज़िक्र किया, जो पहले बाइडेन प्रशासन के समय अमेरिका को जानकारी में था।
शुक्ला ने कहा, “जब भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया था, तब अमेरिका को सबसे पहले सूचित किया गया था। उस समय बाइडेन प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं थी। हां, ट्रंप का अंदाज अलग है, लेकिन मुझे भरोसा है कि दोनों देश इस मसले को संभाल लेंगे।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा, “कतर के साथ भारतीय नाविकों की रिहाई वाला मामला याद कीजिए। तब पीएम मोदी ने सीधे कतर के अमीर से बात की और समाधान निकाला। वैसा ही इस बार भी हो सकता है।” हालांकि शुक्ला ने माना कि यह फैसला भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ तनाव जरूर लाएगा, लेकिन ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह फैसला जरूर झटका है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता टूट गया है। भारत और अमेरिका के विरोधी आज खुश हो सकते हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि मोदी और ट्रंप के मजबूत व्यक्तिगत संबंध इस विवाद को भी हल कर सकते हैं।” राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच थोड़ी दूरी जरूर आ सकती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ये मसला उच्चस्तरीय बातचीत से सुलझाया जा सकता है। दोनों देशों के नेताओं की दोस्ती और मजबूत रिश्ते इस झटके को संभाल सकते हैं।





