रूस का यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, लुत्स्क और वोलिन क्षेत्र मुख्य निशाना

यूक्रेन पर रूस ने मंगलवार रात को अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन और मिसाइल हमला किया। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस ने एक ही रात में रिकॉर्ड 728 ड्रोन और 13 मिसाइलें दागीं। इन हमलों में ईरान निर्मित ‘शहीद’ ड्रोन और कई डिकॉय ड्रोन शामिल थे। मुख्य हमला यूक्रेन के पश्चिमी वोलिन क्षेत्र और उसकी राजधानी लुत्स्क पर हुआ, जो पोलैंड और बेलारूस की सीमा के पास स्थित है।
यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने 296 ड्रोनों और सात मिसाइलों को मार गिराया, जबकि बाकी ड्रोन या तो रडार से गायब हो गए या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से निष्क्रिय कर दिए गए। यह हमला पूरी रात चला और इसके कारण कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं बाधित हो गईं। नागरिकों में दहशत फैल गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई।
राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि लुत्स्क शहर, जो यूक्रेनी एयरफोर्स का एक प्रमुख बेस है, इस हमले में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यहां से कार्गो विमानों और फाइटर जेट्स की नियमित उड़ानें होती हैं। जेलेंस्की ने इसे पश्चिमी आपूर्ति लाइनों पर हमला कर यूक्रेन की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अब अपने घरेलू एंटी-एयरक्राफ्ट ड्रोन सिस्टम को तेजी से विकसित कर रहा है और इंटरसेप्टर ड्रोन्स की मदद से रूसी हमलों को रोकने में कामयाब हो रहा है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल रूस की सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत है। पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले ड्रोन की लागत कम होती है और इन्हें रडार से पकड़ना मुश्किल होता है। साथ ही रूस डिकॉय ड्रोन की मदद से यूक्रेन की एयर डिफेंस को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वह जल्द ही इसका जवाब देगा और रूस की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने के लिए कड़े कदम उठाएगा। साथ ही यूक्रेन ने अमेरिका और नाटो देशों से और अधिक एयर डिफेंस सिस्टम, खासतौर पर पैट्रियट सिस्टम की मांग की है।
रूस के इस हमले की वैश्विक स्तर पर आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने रूस से नागरिक इलाकों को निशाना न बनाने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील की है। यूक्रेन में लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के चलते आम नागरिकों में डर और तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब युद्ध को दो साल से ज्यादा हो चुके हैं और हालात और भी जटिल होते जा रहे हैं।





