राजनीति

संसद में हंगामा: विपक्ष ने फाड़ी बिल की कॉपी, शाह पर उठे सवाल

संसद के मानसून सत्र में बुधवार का दिन भी हंगामे और तीखी नोकझोंक से भरा रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने बिहार एसआईआर और अन्य मुद्दों पर जोरदार विरोध किया। हंगामे के बीच ही लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग विधेयक पेश किया गया। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। इनमें शामिल हैं – संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पेश संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव पेश किया गया। लोकसभा से तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव पास किया गया।

लेकिन विपक्ष इस प्रस्ताव से सहमत नहीं दिखा और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। हंगामे के दौरान विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंक दीं। इससे सदन का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। हंगामे के बीच कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने अमित शाह पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब अमित शाह को गिरफ्तार किया गया था, तब क्या उन्होंने अपनी नैतिकता दिखाई थी?”।


इस पर गृह मंत्री ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा, “मेरे खिलाफ जब आरोप लगे थे, तब मैंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जब तक मैं अदालत से निर्दोष साबित नहीं हुआ, मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला था।” दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन विधेयकों का मकसद यह है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए जाते हैं, तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके। सरकार का तर्क है कि इससे संवैधानिक और प्रशासनिक मर्यादाएं बनी रहेंगी।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह प्रावधान सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार बन सकता है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह के संशोधन लाकर लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है। संसद में बुधवार को पूरे दिन इसी मुद्दे पर हंगामा होता रहा। जहां सत्ता पक्ष इसे “जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम” बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे “लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला” करार दे रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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