पुतिन की भारत यात्रा: 30 घंटे जो बदल सकते हैं कूटनीतिक समीकरण

नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन महज 30 घंटे की अवधि के लिए भारतीय धरती पर कदम रखे हैं, लेकिन यह संक्षिप्त यात्रा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने के लिए काफी है. इस यात्रा ने पड़ोसी देश पाकिस्तान से लेकर अटलांटिक पार स्थित अमेरिकी नेतृत्व तक सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
प्रोटोकॉल से परे: मोदी का विशेष स्वागत
गुरुवार, 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी औपचारिकताओं को दरकिनार करते हुए स्वयं नई दिल्ली के पालम हवाईअड्डे पर रूसी राष्ट्रपति का स्वागत किया. यह दुर्लभ कदम एक स्पष्ट संदेश था – कोई भी बाहरी ताकत भारत और रूस के बीच की मजबूत मित्रता में दरार डालने का प्रयास करे, तो यह रिश्ता और भी मजबूत हो जाएगा. यह दौरा कूटनीतिक संदेशों से भरा हुआ है.
23वां शिखर सम्मेलन: आज का महत्वपूर्ण दिन
शुक्रवार, 5 दिसंबर को पुतिन की यात्रा का सबसे निर्णायक दिन है. आज 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें अनेक अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विषयों पर गहन चर्चा होगी. पूरा विश्व इस बैठक पर पैनी नजर रखे हुए है.
राजनयिक संबंधों में नई ऊंचाई
नई दिल्ली और मॉस्को के बीच राजनयिक जुड़ाव में लगातार वृद्धि हो रही है. पिछले सप्ताह ही कजान में भारत का नवीन वाणिज्य दूतावास अपना कार्य शुरू कर चुका है. इसके अतिरिक्त, येकातेरिनबर्ग में भी शीघ्र ही एक और वाणिज्य दूतावास खोला जाने वाला है.
समझौतों की झड़ी लगने की संभावना
इस यात्रा के दौरान व्यापार, आर्थिक साझेदारी, स्वास्थ्य क्षेत्र और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है. हालांकि रक्षा से जुड़े समझौतों की परंपरागत रूप से शिखर सम्मेलनों में सार्वजनिक घोषणा नहीं की जाती, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण बातचीत होगी.
आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष
सरकारी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग – जो 2002 से निरंतर जारी है – द्विपक्षीय संबंधों की एक विशिष्ट पहचान है.





