पुतिन ने तेल व्यापार पर भारत का किया समर्थन, अमेरिकी दबाव के बीच मोदी को बताया “बुद्धिमान नेता”

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखने के भारत के फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि नई दिल्ली कभी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगी और न ही खुद को “अपमानित” होने देगी.
सोची में वल्दाई डिस्कशन क्लब के पूर्ण अधिवेशन में बोलते हुए, पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक “संतुलित और बुद्धिमान नेता” के रूप में प्रशंसा की और मॉस्को और नई दिल्ली के बीच “विशेष” संबंधों पर प्रकाश डाला.
पुतिन ने कहा, “भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह से एक आर्थिक गणना है. इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं है.” उन्होंने बताया कि रूसी तेल से इनकार करने पर भारत को अनुमानित 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा, जबकि व्यापार जारी रखने पर प्रतिबंधों का भी उतना ही वित्तीय प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने पूछा, “तो अगर इसकी घरेलू राजनीतिक कीमत भी चुकानी पड़ती है, तो इनकार क्यों किया जाए?”
उन्होंने आगे कहा, “भारत जैसे देश की जनता अपने नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णयों पर कड़ी नज़र रखेगी और किसी भी अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी. और मुझे पता है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं ऐसा कोई कदम कभी नहीं उठाएँगे. दंडात्मक शुल्कों से होने वाले नुकसान की भरपाई रूस से तेल आयात से होगी, साथ ही भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठा भी मिलेगी.”
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत और चीन पर रूसी तेल खरीद के माध्यम से यूक्रेन युद्ध के “प्राथमिक वित्तपोषक” होने का आरोप लगाने के कुछ ही हफ़्ते बाद आई है.
पुतिन ने चेतावनी दी कि इस तरह के दंडात्मक शुल्क वैश्विक कीमतों को बढ़ा सकते हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रह सकती हैं.
रूसी नेता ने दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी को भी रेखांकित किया. रशिया टुडे के अनुसार, उन्होंने कहा, “लगभग 15 साल पहले, हमने एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी. यह हमारे संबंधों का सबसे अच्छा वर्णन है. प्रधानमंत्री मोदी एक बहुत ही बुद्धिमान नेता हैं जो सबसे पहले अपने देश के बारे में सोचते हैं.”





