राजनीति

जनता का थप्पड़: रेखा गुप्ता से लेकर केजरीवाल तक, कौन-कौन बना निशाना?

दिल्ली की राजनीति सोमवार को उस वक्त गरमा गई जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जनसुनवाई कार्यक्रम में जनता से रूबरू हो रही थीं। यह एक नियमित मुलाकात थी जिसमें लोग अपनी शिकायतें लेकर आए थे। लेकिन अचानक भीड़ में से एक शख्स मंच तक पहुँचा और मुख्यमंत्री का हाथ खींचकर उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। इस दौरान अफरा-तफरी मच गई, सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को काबू में किया और सीएम को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सुरक्षा चूक और बढ़ते जनाक्रोश को लेकर बहस छिड़ गई।

यह घटना कोई पहली बार नहीं है। भारतीय राजनीति में कई बड़े नेताओं पर इसी तरह के सार्वजनिक हमले हो चुके हैं। आइए जानते हैं किन-किन नेताओं को जनता की नाराज़गी का शिकार होना पड़ा।

अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने राजनीतिक करियर में कई बार असहज करने वाले हमलों का सामना किया है। 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर इलाके में हुए एक रोडशो में एक युवक ने अचानक गाड़ी पर चढ़कर केजरीवाल को थप्पड़ मार दिया। उस वक्त केजरीवाल खुली गाड़ी में हाथ हिला रहे थे और भीड़ उनसे मिलने को बेताब थी। तभी आरोपी ने भीड़ का फायदा उठाकर उनके पास पहुंचकर थप्पड़ जड़ दिया। यह घटना टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। आम आदमी पार्टी ने इसे विपक्ष द्वारा प्रायोजित हमला बताया और दिल्ली पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। वहीं आरोपी युवक का कहना था कि वह केजरीवाल की नीतियों से नाखुश था। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गरमा दिया था।

स्वामी प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा सुर्खियों में रहने वाले समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य भी सार्वजनिक थप्पड़ का सामना कर चुके हैं। रायबरेली में आयोजित एक स्वागत समारोह में करणी सेना का एक कार्यकर्ता माला लेकर उनके पास पहुंचा। मौर्य जैसे ही आगे बढ़े, तभी उस कार्यकर्ता ने अचानक थप्पड़ जड़ दिया। कार्यक्रम स्थल पर भगदड़ मच गई और सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को पकड़ लिया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। समर्थकों ने इसे साजिश बताया, जबकि विरोधियों ने इसे जनता की नाराज़गी का इज़हार करार दिया। यह घटना राजनीति में नेताओं और जनता के बीच बढ़ती खाई और गुस्से का उदाहरण मानी गई।

महेंद्र राजभर

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में आयोजित महाराजा सुहेलदेव जयंती समारोह में समाजवादी पार्टी नेता महेंद्र राजभर के साथ जो हुआ, उसने राजनीति को हिला कर रख दिया। मंच पर जब उन्हें सम्मानित करने के लिए माला पहनाई गई, तभी उसी व्यक्ति ने अचानक कई बार थप्पड़ मार दिए। मंच पर मौजूद अन्य नेताओं और समर्थकों को समझ नहीं आया कि यह सब इतना अचानक कैसे हो गया।
इस घटना ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि यह PDA समाज (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के नेताओं को डराने और अपमानित करने की कोशिश है। वहीं भाजपा ने इसे केवल एक “व्यक्तिगत विवाद” बताकर पल्ला झाड़ लिया।

कंगना रनौत

बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत भी एक बार थप्पड़ विवाद में फंस चुकी हैं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान CISF की एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। वजह यह बताई गई कि कांस्टेबल कंगना के कुछ राजनीतिक बयानों से नाराज़ थी। यह घटना राष्ट्रीय सुर्खियों में छा गई। सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंट गए—कुछ ने कांस्टेबल के कदम को अनुचित ठहराया, तो कुछ ने इसे “जनता के गुस्से की आवाज़” कहा। राजनीतिक गलियारों में भी इस पर लंबी बहस चली और मामला संसद तक पहुंचा।

कन्हैया कुमार

जेएनयू छात्र राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार पर भी हमला हो चुका है। दिल्ली में एक सभा से बाहर निकलते वक्त उन पर दो लोगों ने हमला किया—एक ने उन्हें थप्पड़ मारा और दूसरे ने उन पर स्याही फेंक दी। यह घटना बेहद चर्चित रही क्योंकि उस समय कन्हैया कुमार देशद्रोह के आरोपों के चलते पहले से ही सुर्खियों में थे। इस हमले ने राजनीति में ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया। समर्थकों ने इसे लोकतंत्र की हत्या कहा, जबकि विरोधियों ने इसे “जनता की प्रतिक्रिया” बताया।

शरद यादव

2011 में जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव पर भीड़ के बीच हमला हुआ। एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर ने बढ़ती महँगाई से नाराज़ होकर उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद सभा में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। यह घटना उस दौर की राजनीतिक तस्वीर पेश करती है जब महँगाई आम जनता का सबसे बड़ा मुद्दा थी। विपक्ष ने इसे जनता की नाराज़गी का प्रतीक कहा जबकि जेडीयू नेताओं ने इसे सुनियोजित हमला बताया।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर 2014 में एक बेरोज़गार युवक ने हमला किया। युवक ने सीधे मंच पर जाकर हुड्डा को थप्पड़ मारा। बाद में युवक ने कहा कि वह लंबे समय से नौकरी की तलाश में था और सरकार से निराश हो चुका था।
यह घटना इस बात का प्रतीक बनी कि बेरोज़गारी और युवा असंतोष राजनीति में किस तरह खतरनाक रूप ले सकता है। हुड्डा ने इसे एक “दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्तिगत घटना” बताया, लेकिन राजनीतिक विरोधियों ने इसे जनता का असली गुस्सा करार दिया।

रेखा गुप्ता पर हुआ हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े नेताओं को जनता के थप्पड़ों और हमलों का सामना करना पड़ा है। कभी यह घटनाएं व्यक्तिगत गुस्से से उपजती हैं, तो कभी राजनीतिक असंतोष इसका कारण बनता है। लेकिन हर बार इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और नेताओं और जनता के बीच बने अविश्वास को और गहरा कर दिया।
लोकतंत्र में असहमति जाहिर करना ज़रूरी है, लेकिन सवाल यही है कि क्या हिंसा और थप्पड़ जैसी घटनाएं उस असहमति को सही दिशा में ले जा पाती हैं या फिर यह सिर्फ राजनीति को और कड़वाहट से भर देती हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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