यौन शोषण से बचाव के लिए बच्चों को पहले ही दें जरूरी जानकारी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को यौन शिक्षा (Sex Education) की जानकारी उम्र के अनुसार और पहले से दी जानी चाहिए, न कि सिर्फ 9वीं क्लास से शुरू करना ही काफी है। कोर्ट ने यह बात एक 15 साल के लड़के को जमानत देते हुए कही, जिस पर POCSO और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराध्य की बेंच ने कहा कि बच्चों को किशोरावस्था (puberty), भावनाओं, सहमति (consent), और निजी सुरक्षा के बारे में शुरुआती उम्र से ही जागरूक किया जाना चाहिए। इससे वे बेहतर फैसले ले सकेंगे और खुद को किसी भी तरह के शोषण से बचा पाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल स्कूलों में यौन शिक्षा एनसीईआरटी (NCERT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार 9वीं कक्षा से शुरू होती है। लेकिन कोर्ट ने इस व्यवस्था को नाकाफी बताया। जजों ने कहा कि आज के समय में कई बच्चे इससे पहले ही शारीरिक बदलावों से गुजरने लगते हैं और उन्हें सही जानकारी न मिल पाने से भ्रम और गलतफहमियां पैदा होती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की शिक्षा संस्थाओं से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और स्कूली शिक्षा में उम्र के अनुसार वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से यौन शिक्षा को पहले से शामिल करने के उपाय करें। हालांकि कोर्ट ने इसे कोई बाध्यकारी आदेश के रूप में नहीं दिया, लेकिन यह टिप्पणी शिक्षा नीति में बदलाव की दिशा में एक अहम सुझाव मानी जा रही है।
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अभिभावकों, शिक्षकों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों ने इसे एक सकारात्मक और प्रगतिशील कदम बताया है, जो बच्चों को बेहतर समझ, सम्मान और जिम्मेदारी सिखाने में मदद करेगा।
यह फैसला याद दिलाता है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जीवन को समझने और बेहतर इंसान बनने में भी मदद करनी चाहिए।





