मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू, 9 फरवरी को CM बीरेन सिंह ने दिया था इस्तीफा

मणिपुर में बीजेपी की ओर से अब तक नए सीएम का फैसला ना ले पाने के कारण केंद्र सरकार ने गुरुवार को मणिपुर में राष्ट्रपति शासल लगा दिया. राज्य के मुख्यमंत्री पद से एन.बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के चार दिन बाद यह फैसला लिया गया.
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। pic.twitter.com/EkIhLZSNRH
— NewsMobile Samachar (@NewsMobileHindi) February 13, 2025
राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता और सत्तारूढ़ भाजपा की तरफ से अब तक नए नेता के बारे में फैसला नहीं लेने के बीच यह कदम उठाया गया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और पार्टी विधायकों के बीच कई दौर की चर्चा के बावजूद गतिरोध बना हुआ है.
पात्रा पिछले दो दिन में दो बार राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर चुके हैं. पात्रा ने स्थिति पर चर्चा करने के लिए राज्य के उपभोक्ता मामलों के मंत्री एल. सुसिंड्रो और विधायक करम श्याम समेत भाजपा विधायकों के साथ भी बैठक की.
मणिपुर पिछले कई समय से हिंसा का क्षेत्र बना हुआ है. यहां हिंसा के पीछे 2 वजह रही है. यहां मैतेई समुदा वजहय को अनूसूचित जनजाति का दर्जा राज्य सरकार की तरफ से दी गई थी. मणिपुर में मैतेई समुदाय बहुसंख्यक वर्ग में आता है, लेकिन इन्हें अनुसचित जनजाति का दर्जा दे दिया गया था. बाद में हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी. मैतेई को एसटी के दर्जे मिलने के फैसले का कुकी और नागा समुदाय के लोगों की तरफ से विरोध किया गया था.कुकी और नागा समुदायों के पास आजादी के बाद से ही आदिवासी का दर्जा है.
हिंसा की दूसरी वजह है, सरकारी भूमि सर्वेक्षण. राज्य सरकार की तरफ से आरक्षित वन क्षेत्र खाली करवाने की बात कही गयी थी. आदिवासी ग्रामीणों से आरक्षित वन क्षेत्र खाली करवाने के फैसले का भी जमकर विरोध देखने को मिला इस कारण भी हिंसा की घटनाएं हुई.





