PM मोदी की यूके और मालदीव यात्रा: व्यापार समझौता और कूटनीतिक संबंध होंगे अहम मुद्दे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में चार दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा का पहला चरण 23 और 24 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) का होगा, जहां भारत और यूके के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। समझौते के तहत ब्रिटेन को होने वाले 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर टैरिफ में छूट दी जाएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ होगा। साथ ही भारत के लिए ब्रिटिश उत्पादों—जैसे व्हिस्की और कारों—का आयात भी सरल और सस्ता हो जाएगा।
ब्रिटेन के साथ FTA पर समझौता कई वर्षों से लंबित था और इसके पूरा होने को दोनों देशों के आर्थिक सहयोग में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और व्यापार अधिकारियों के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें भी होंगी, जिनमें रणनीतिक साझेदारी, निवेश और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। ब्रिटेन दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 25 और 26 जुलाई को मालदीव की यात्रा पर जाएंगे। वे वहां मालदीव के 60वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी की पहली मालदीव यात्रा होगी।
मालदीव और भारत के रिश्तों में हाल के समय में कुछ तनाव देखा गया है, खासकर वहां के कुछ नेताओं द्वारा की गई भारत विरोधी बयानबाजी और अभियानों के कारण। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले जून 2019 में मालदीव की यात्रा पर गए थे। इस बार की यात्रा को कूटनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ना सिर्फ भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को बल देती है, बल्कि मालदीव के साथ रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी को भी आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है। प्रधानमंत्री की यह चार दिवसीय विदेश यात्रा व्यापार, कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





