प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की क्षमता की अनदेखी के लिए कांग्रेस की आलोचना की, आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

भावनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में भाग लिया और 34,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.
#WATCH भावनगर, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में भाग लिया और 34,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। pic.twitter.com/m9FByjXfWh
— NewsMobile Samachar (@NewsMobileHindi) September 20, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ये कार्यक्रम तो भावनगर में रहा है लेकिन ये कार्यक्रम पूरे भारत का है. आज भावनगर निमित्त है. पूरे भारत में समुद्र से समृद्धि की ओर जाने की हमारी दिशा क्या है उसके लिए आज इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का केंद्र भावनगर चुना गया है. गुजरात और भावनगर के लोगों को बहुत-बहुत बधाई.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अभी 17 सितंबर को आप सबने अपने नरेंद्र भाई को जो शुभकामनाएं भेजी हैं, देश और दुनिया से जो शुभकामनाएं मुझे मिली है उसके लिए मैं सार्वजनिक रूप से देश और दुनिया के सभी महानुभावों का आभार व्यक्त करता हूं.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा और दुनिया के सामने मजबूती से खड़ा होना होगा.” उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने दशकों बर्बाद कर दिए. पहले तो उसने देश को लाइसेंस-कोटा राज में फँसा दिया और हमें विश्व बाज़ारों से अलग कर दिया. बाद में, जब वैश्वीकरण आया, तो उन्होंने आयात का ही रास्ता अपनाया.”
उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों और ख़राब नीतिगत फ़ैसलों ने युवाओं को नुकसान पहुँचाया और भारत को अपनी असली ताकत दिखाने से रोका. मोदी ने कहा, “हज़ारों करोड़ रुपये के घोटाले हुए. इन नीतियों ने भारत की प्रगति को अवरुद्ध कर दिया.”
दूसरे देशों पर निर्भरता को भारत का “सबसे बड़ा दुश्मन” बताते हुए, प्रधानमंत्री ने देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विदेशी निर्भरता कम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा, “आज भारत विश्वबंधु (दुनिया का दोस्त) की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर हमारा कोई बड़ा दुश्मन नहीं है. हमारा सबसे बड़ा दुश्मन दूसरे देशों पर निर्भरता है.” उन्होंने आगे कहा, “अगर हम निर्भर रहेंगे, तो हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुँचेगी. 1.4 अरब लोगों का भविष्य दूसरों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता.”
मोदी ने आत्मनिर्भरता को “सौ दुखों की एकमात्र दवा” बताया और कहा कि यह वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए आवश्यक है.
प्रधानमंत्री ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र को भी आत्मनिर्भरता के लिए एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया. उन्होंने अपनी सरकार के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रयासों को दोहराते हुए कहा, “हम लंबे समय से कच्चे तेल और गैस के लिए विदेशी देशों पर निर्भर रहे हैं और हर साल लाखों करोड़ रुपये खर्च करते हैं. यह पैसा भारत के बजाय विदेशों में रोज़गार पैदा करता है. इस स्थिति को बदलना होगा.”





