पिलीभित पुलिस ने साइबर फ्रॉड का किया भंडाफोड़ , तीन आरोपी गिरफ्तार

पिलीभित पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया, जो कई राज्यों में लोगों को निशाना बना रहा था और पिलीभित के एक कॉल सेंटर से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो बैंक खातों से अवैध रूप से पैसा निकालने में शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ने इस तरह के कॉल सेंटर चलाने की तकनीक दुबई में सीख थी। गिरफ्तारियों से पहले राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई।
पिलीभित ASP विक्रम दहिया ने बताया कि जांच में यह पता चला कि घुघनई क्षेत्र में गोरव शर्मा द्वारा चलाए जा रहे जन सेवा केंद्र से असामान्य गतिविधियां हो रही थीं। निगरानी के आधार पर पुलिस ने आरोपी मास्टरमाइंड अमृतपाल सिंह को हरिपुर अजितपुर बिल्हा से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से नौ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, ₹59,000 से अधिक नकद, प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, कई बैंक पासबुक, भारतीय और विदेशी फर्जी आईडी और अन्य आपराधिक सामग्री बरामद की गई।
जांच में अमृतपाल ने बताया कि वह 2024 में दुबई गया था, जहां उसने अवैध कॉल सेंटर चलाने का तरीका सीखा। लौटकर उसने अपने घर पर एक फर्जी कॉल सेंटर शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स जैसे Aviator और Rummy का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निशाना बनाया। पहले वह छोटे-छोटे पैसे भेजकर और लोगों का विश्वास जीतकर उनके बैंक विवरण जुटाते और फिर खातों से पैसे निकाल लेते थे। गिरोह ने संभावित शिकारों की जानकारी डार्क वेब से मोबाइल नंबर खरीदकर जुटाई।
अमृतपाल के दो अन्य साथी भी गिरफ्तार हुए। धर्मेंद्र कुमार उद्राहा गांव के निवासी हैं, जो बैंक एजेंट के रूप में खाते खोलते और अमृतपाल को फ्रॉड ट्रांजेक्शन के लिए उपलब्ध कराते थे। कुछ खाताधारकों को कमीशन के रूप में छोटे भुगतान भी किए गए। प्रियंशु दीक्षित घुघनई का निवासी है, जिसने अमृतपाल को ₹1,000 प्रति सिम बेचकर प्री-एक्टिवेटेड सिम मुहैया कराई। उसने एक ही पहचान से दो सिम बनाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के सिस्टम का दुरुपयोग किया।
पुलिस को संदेह है कि जन सेवा केंद्र का असली मालिक गोरव शर्मा, धर्मेंद्र के माध्यम से गिरोह चला रहा था। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने मैनहंट शुरू किया है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खाते ओड़िशा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े थे।





