भारत-अमेरिका की साझेदारी से निसार सैटेलाइट लॉन्च, धरती की निगरानी में आएगा बड़ा बदलाव

भारत ने बुधवार को नासा के साथ मिलकर तैयार किए गए निसार (NISAR) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह पर होने वाले बदलावों की बारीकी से निगरानी करेगा और पर्यावरण की सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया युग शुरू करेगा। इस अंतरिक्ष मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम 5:40 बजे प्रक्षेपित किया गया। निसार को भारत के सबसे बड़े गैर-पुन: प्रयोग योग्य तीन-चरणीय रॉकेट जीएसएलवी मार्क-2 के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। यह रॉकेट 52 मीटर (लगभग 170 फीट) लंबा है।
निसार का पूरा नाम है ‘नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार’। इस सैटेलाइट की सबसे खास बात यह है कि इसमें दो प्रकार के शक्तिशाली रडार लगे हैं — एक L-बैंड रडार जिसे नासा ने तैयार किया है, और दूसरा S-बैंड रडार जिसे इसरो ने विकसित किया है। इन दोनों रडारों की मदद से यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह पर इतने बारीक बदलावों को भी पहचान सकता है, जो सामान्यत: इंसानी आंखों से देखे नहीं जा सकते। निसार दिन और रात दोनों समय, चाहे मौसम जैसा भी हो, लगातार डेटा भेजने में सक्षम होगा। यह हर 12 दिन में पृथ्वी की जमीन और बर्फ से ढकी सतहों का एक बार फिर से स्कैन करेगा। इस तरह की नियमित निगरानी की क्षमता अभी तक किसी अन्य सैटेलाइट में नहीं देखी गई है।
लॉन्च के बाद निसार को पूरी तरह सक्रिय होने में थोड़ा समय लगेगा। पहले 8 से 10 दिनों में यह सैटेलाइट अपने उपकरणों को फैलाएगा और सेटअप पूरा करेगा। इसके बाद करीब 65 दिन का एक इंजीनियरिंग चरण चलेगा, जिसमें वैज्ञानिक इसकी कार्यप्रणाली की जांच करेंगे, कैलिब्रेशन करेंगे और तकनीकी परीक्षण पूरे करेंगे। यह सब कुछ सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद निसार नियमित रूप से अपना संचालन शुरू कर देगा और विश्वभर के वैज्ञानिकों को डेटा उपलब्ध कराएगा।
निसार सैटेलाइट के जरिए मिलने वाला डेटा कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम आएगा। यह भूकंप, भूस्खलन और ज्वालामुखी जैसी आपदाओं की सटीक निगरानी में मदद करेगा जिससे समय पर चेतावनी जारी की जा सकेगी। इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में भी यह सैटेलाइट क्रांति ला सकता है क्योंकि यह फसलों की स्थिति और मिट्टी में मौजूद नमी के स्तर की जानकारी देगा। जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में भी निसार अहम साबित होगा क्योंकि यह बर्फ की परतों के पिघलने, जंगलों के बदलाव और कार्बन चक्र जैसी चीजों पर नजर रखेगा।
यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। जहां एक ओर नासा ने इसमें प्रमुख उपकरण जैसे L-बैंड रडार और अन्य तकनीकी सिस्टम दिए, वहीं इसरो ने सैटेलाइट का ढांचा तैयार किया और इसकी लॉन्चिंग का जिम्मा संभाला। इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि निसार से मिलने वाला डेटा पूरी दुनिया के लिए मुफ्त और खुला उपलब्ध हो ताकि इसका लाभ केवल वैज्ञानिक संस्थाओं तक सीमित न रहकर आम जनता और सरकारों तक भी पहुंचे।
निसार मिशन दिखाता है कि जब दो देशों की तकनीकी क्षमताएं और वैज्ञानिक सोच एक साथ आती हैं, तो पृथ्वी की रक्षा और पर्यावरण की निगरानी के क्षेत्र में असाधारण काम किया जा सकता है। यह सैटेलाइट न सिर्फ भारत और अमेरिका की दोस्ती को मजबूती देता है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नई उम्मीद भी जगाता है।





