दिल्ली ब्लास्ट में नई कड़ी: कानपुर में पुलिस ने पकड़े 9 संदिग्ध, पूछताछ जारी

दिल्ली में सोमवार को हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सक्रिय हो गई हैं। जांच के सिलसिले में कानपुर पुलिस ने नौ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस इनसे यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इनका किसी भी रूप में दिल्ली ब्लास्ट से संबंध है।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के जॉइंट सीपी आशुतोष कुमार ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों की टीमें मिलकर इनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं ताकि ब्लास्ट की साजिश से जुड़ी कोई कड़ी सामने आ सके।
जॉइंट सीपी ने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से हैं। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन करीब सात साल तक कानपुर में रही थी। अब पुलिस उसके संपर्कों और पुराने ठिकानों का पता लगाने में जुटी है।
दिल्ली ब्लास्ट के मामले में फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. शाहीन आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा “जमात-उल-मोमिनात” की भारत प्रमुख बताई जा रही है। इस संगठन की वैश्विक प्रमुख सादिया अहमद, जैश के संस्थापक मसूद अजहर की बहन है। बताया जाता है कि शाहीन को संगठन में महिला रिक्रूटमेंट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, शाहीन ने करीब 25 साल पहले प्रयागराज (तब इलाहाबाद) के मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए चयनित होकर कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी थी। लेकिन साल 2013 में वह अचानक कॉलेज से गायब हो गई, और तब से उसका कोई अता-पता नहीं था।
शाहीन की शादी महाराष्ट्र निवासी जफर हयात से हुई थी, हालांकि यह रिश्ता अधिक समय तक नहीं चला और दोनों का तलाक हो गया। अब दिल्ली ब्लास्ट में उसकी गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां उसकी पुरानी गतिविधियों, संपर्कों और विदेश कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं।
फरीदाबाद पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। बुधवार को पुलिस ने मुख्य संदिग्ध डॉ. उमर उन नबी से जुड़ी मानी जा रही लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार को बरामद किया है। यह वही गाड़ी है, जिसके लिए दिल्ली और आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया था। पुलिस ने इस वाहन को फरीदाबाद के खंदावली गांव के पास खड़ा पाया।
यह बरामदगी उस भीषण विस्फोट के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें दिल्ली के लाल किले के पास 12 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कार विस्फोट से पहले और बाद में संदिग्धों की गतिविधियों से जुड़ा अहम सुराग साबित हो सकती है।





