ट्रंप से मिले नेतन्याहू, बोले- नोबेल शांति पुरस्कार के लिए करूंगा नामांकन; गाजा युद्ध पर बातचीत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात वॉशिंगटन में हुई। यह पहली बार था जब दोनों नेता मई में ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों और इज़राइल-ईरान के बीच हुए सीमित युद्ध के बाद आमने-सामने बैठे। इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने मध्य पूर्व में शांति की दिशा में जो प्रयास किए हैं, वह ऐतिहासिक हैं।
नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में डिनर से पहले ट्रंप को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने नोबेल समिति से ट्रंप के नाम की सिफारिश की है। नेतन्याहू ने कहा, “यह केवल इज़राइल नहीं, बल्कि यहूदी समुदाय की ओर से आपका आभार है। आप इसके हकदार हैं।” ट्रंप ने भी इसका जवाब देते हुए कहा, “आपकी ओर से यह सम्मान बहुत मायने रखता है।”
ट्रंप की इस मुलाकात में एक अहम मुद्दा इज़राइल और हमास के बीच पिछले 21 महीनों से जारी युद्ध भी रहा। ट्रंप ने नेतन्याहू से युद्ध रोकने और संघर्षविराम पर सहमति जताने को कहा, क्योंकि गाजा में अब तक करीब 60,000 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकतर आम फिलिस्तीनी नागरिक हैं।
इस बीच कतर में सोमवार को इज़राइल और हमास के बीच छह हफ्तों बाद परोक्ष वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने संघर्षविराम की संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, हालांकि अभी भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। नेतन्याहू की मांग है कि हमास को गाजा से पूरी तरह हटाया जाए और युद्ध दोबारा न शुरू हो, इसकी गारंटी दी जाए।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इज़राइल गाजा के सभी निवासियों को जबरन बाहर निकालने की योजना बना रहा है, तो ट्रंप ने जवाब नेतन्याहू को देने को कहा। इस पर नेतन्याहू ने कहा, “यह लोगों की अपनी मर्जी है। अगर वे रहना चाहते हैं तो रह सकते हैं और अगर जाना चाहें, तो उन्हें जाने दिया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “गाजा को जेल नहीं बनाना चाहिए। यह एक खुली जगह होनी चाहिए जहां लोगों के पास विकल्प हों।” नेतन्याहू ने दावा किया कि इज़राइल और अमेरिका मिलकर ऐसे देशों की तलाश कर रहे हैं, जो फिलिस्तीनियों को बेहतर भविष्य देने के लिए तैयार हों। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति हो रही है।
ईरान को लेकर ट्रंप ने कहा कि वह नहीं चाहते कि अमेरिका फिर से उस पर हमला करे। “मुझे लगता है वे अब अलग सोच रहे हैं। दो हफ्ते पहले जैसे थे, वैसे अब नहीं हैं,” ट्रंप ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत कब होगी, इसकी जानकारी वे अगली सुबह देंगे। यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप ने कहा कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बेहद नाराज़ हैं। उन्होंने कहा, “मैं निराश हूं कि पुतिन अब तक पीछे नहीं हटे।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि अमेरिका यूक्रेन को और हथियार भेजेगा ताकि वह खुद का बचाव कर सके।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि हमास संघर्षविराम के लिए तैयार है, लेकिन इससे ज़्यादा उन्होंने कोई जानकारी साझा नहीं की। जब उनसे दो-राष्ट्र समाधान पर सवाल किया गया, तो उन्होंने फिर से नेतन्याहू की ओर इशारा किया। नेतन्याहू ने कहा कि वह चाहते हैं कि फिलिस्तीनी खुद को प्रशासनिक रूप से संचालित करें, लेकिन सुरक्षा जैसी शक्तियां इज़राइल के पास ही रहें। “हम चाहते हैं कि वे खुद को चलाएं, लेकिन हमारी सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होना चाहिए,” उन्होंने कहा।
नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप की अगुवाई में पूरे मध्य पूर्व में शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सहयोग से सभी पड़ोसी देशों को शामिल करते हुए एक व्यापक शांति समझौता संभव हो सकता है। इससे पहले नेतन्याहू ने वॉशिंगटन रवाना होने से पहले कहा था कि संघर्षविराम को लेकर एक समझौता हो सकता है और इज़राइली वार्ताकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इज़राइली मीडिया ने कतर में हुई बातचीत को सकारात्मक बताया, जबकि फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हुई।
वॉशिंगटन में नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और मिडिल ईस्ट शांति दूत स्टीव विटकॉफ से भी मुलाकात की। वे यहां उपराष्ट्रपति जेडी वांस और हाउस स्पीकर माइक जॉनसन से भी मिलेंगे। इस मुलाकात ने न केवल इज़राइल-गाजा संघर्ष पर नई उम्मीद जगाई है, बल्कि अमेरिकी चुनावों के बीच ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को फिर से चर्चा में ला दिया है।





