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NEET-UG परीक्षा मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

NEET-UG: विवादों के बीच घिरी नीट परीक्षा मामले पर आज अदालत में तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ सुनवाई कर रही है. कोर्ट में दलीलें पेश की जा रही हैं. बता दें कि NEET एग्जाम 5 मई को आयोजित हुआ था. 67 टॉपर सामने आने के बाद से ही यह परीक्षा विवादों में है.

 

बता दें कि इस मामले पर दायर ज्यादातर याचिकाओं पर सुनवाई पहले ही हो चुकी है लेकिन आज 40 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई होनी है. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की याचिका भी शामिल है, जिसमें उसने विभिन्न उच्च न्यायालयों में उसके खिलाफ लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की अपील की गई है.

याचिकाकर्ता ने एनटीए पर उठाए सवाल 

 

CJI ने कहा आईआईटी मद्रास की रिपोर्ट में क्या कुछ कहा गया है वह बताया जाय.

याचिकाकर्ता- एनटीए और सरकार अंकों में तेजी से हुई वृद्धि के लिए दो कारण बता रहे हैं – पहला ये कि सिलेबस में कमी और दूसरा उम्मीदवारों की बढ़ी संख्या. लेकिन NTA ने अपने जवाब में पूरी जानकारी नहीं दी है.

याचिकाकर्ता के वकील- सिलेबस में बढ़ोतरी और कमी दोनों हुई है. NTA सिलेबस में बढ़ोतरी की बात नहीं कर रहा हैं. मैं बढ़ा हुआ पाठ्यक्रम दिखा सकता हूं.

याचिकाकर्ता के वकील- अंकों में बढ़ोत्तरी की बात स्वीकार की गई है. लीक की भी बात स्वीकार की गई है. ग्राफ मैप में इस बात का संकेत नहीं है कि कोई असामान्यता नहीं है. क्योंकि, डेटा बहुत बड़ा है, जिसे पकड़ा नहीं जा सकता. 23 लाख अभ्यर्थियों के इस बड़े डेटा में बारीक भिन्नता नहीं पकडी जा सकती.

याचिकाकर्ता- 571 शहरों की बात कही जा रही हैं. NTA का कहना हैं कि टॉपर्स अलग अलग शहरों से हैं. लेकिन जो डेटा देते हैं, वह सिर्फ 17 छात्रों का है. वे क्यों पीछे हट रहे हैं? अगर उन्होंने टॉप 100 की लिस्ट दी है, तो उन्हें सिर्फ 17 नहीं, बल्कि टॉप 100 के बारे में भी बताना चाहिए.

याचिकाकर्ता- IIT मद्रास की रिपोर्ट कहती है कि 23 लाख छात्रों के डेटा के एनालिसिस पर शेप का कर्व बन रहा इसलिए कोई गड़बड़ या लीक नहीं हुआ है. लेकिन इतने बड़े डेटा में लीक और गड़बड़ियां इतने सूक्ष्म स्तर पर हुई हैं कि उसे इतनी आसानी से नहीं पकड़ा जा सकता है.

 

वकील हुड्डा- IIT मद्रास की डेटा एनालिसिस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसमें conflict of interest है, क्योंकि इसके डायरेक्टर एनटीए गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं.

SG- ये गलत है, जो भी IIT जेईई एडवांस्ड करवाती है उसके चेयरमैन NTA के सदस्य होते हैं. लेकिन जिस डायरेक्टर ने ये रिपोर्ट तैयार की, वो इसके मेंबर नहीं हैं. उन्होंने प्रो गोपालाकृष्णन को NTA की मीटिंग्स अटेंड करने के लिए भेजा था.

 

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