NASA का Artemis II मिशन: चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा के बाद पृथ्वी पर वापसी को तैयार अंतरिक्ष यात्री

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने के बाद, नासा (NASA) के आर्टेमिस II मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री अब सुरक्षित धरती पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side of the Moon) का चक्कर लगाने के बाद, ओरियन स्पेसक्राफ्ट शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को प्रशांत महासागर में लैंड करने वाला है।
ऐतिहासिक लूनर फ्लाईबी और ‘स्प्लैशडाउन’
इस 10 दिवसीय मिशन के दौरान, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हेंसन ने पृथ्वी से उतनी दूरी तय की है, जितनी पहले किसी भी इंसान ने नहीं की। मिशन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण ‘स्प्लैशडाउन’ (समुद्र में लैंडिंग) होने वाला है, जो सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में 0007 GMT पर निर्धारित है।
क्यों खास है यह मिशन?
आर्टेमिस II नासा के उस बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में मानव को चंद्रमा की सतह पर उतारना और वहां स्थायी आधार बनाना है। इस यात्रा के दौरान क्रू ने चंद्रमा के अभूतपूर्व दृश्यों को कैमरे में कैद किया और महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया, जो भविष्य के लूनर लैंडिंग मिशनों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
वर्तमान में, ओरियन अंतरिक्ष यान के अंदर से जारी की गई तस्वीरों में चारों अंतरिक्ष यात्री काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। इस मिशन की सफलता न केवल नासा, बल्कि पूरी मानवता के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के एक नए युग की शुरुआत है। दुनिया भर की नजरें अब उनकी सुरक्षित लैंडिंग और रिकवरी ऑपरेशन पर टिकी हैं।





