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पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 114वें एपिसोड को किया संबोधित, कहा- “मन की बात में हमारी इस यात्रा के 10 वर्ष पूरे”

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 114वें एपिसोड को किया संबोधित, कहा- “मन की बात में हमारी इस यात्रा के 10 वर्ष पूरे”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर महीने के आखिरी संडे को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 114वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ के श्रोता ही इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार हैं। उन्होंने कहा कि आज का यह एपिसोड मुझे भावुक कर देने वाला है… इसका कारण यह है कि मन की बात में हमारी इस यात्रा के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं…।

पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियो, आज का यह एपिसोड मुझे भावुक कर देने वाला है। यह मुझे बहुत सारी पुरानी यादों से भर रहा है। इसका कारण यह है कि मन की बात में हमारी इस यात्रा के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं। 10 साल पहले ‘मन की बात’ का प्रारंभ 3 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन हुआ था और ये कितना पवित्र संयोग है, कि इस साल 3 अक्टूबर को जब ‘मन की बात’ के 10 वर्ष पूरे होंगे, तब नवरात्रि का पहला दिन होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। बारिश का यह मौसम हमें याद दिलाता है कि ‘जल संरक्षण’ कितना महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने कहा कि झांसी में कुछ महिलाओं ने घुरारी नदी को नया जीवन दिया है। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और उन्होनें ‘जल सहेली’ बनकर इस अभियान का नेतृत्व किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक सीमावर्ती गांव है ‘झाला’…यहां के युवाओं ने अपने गांव को स्वच्छ रखने के लिए एक खास पहल शुरू की है। वे अपने गांव में ‘धन्यवाद प्रकृति’ अभियान चला रहे हैं। इसके तहत गांव में रोजाना दो घंटे सफाई की जाती है। गांव की गलियों में बिखरे हुए कूड़े को समेटकर गांव के बाहर तय जगह पर डाला जाता है…।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने पूरा अपनापन दिखाते हुए मुझे डेलावेयर में अपने निजी निवास पर इनमें से कुछ कलाकृतियां दिखाईं। लौटाई गई कलाकृतियां टेराकोटा, स्टोन, हाथी के दांत, लकड़ी, तांबे और कांस्य जैसी चीज़ों से बनी हुई हैं…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारी ‘संथाली’ भाषा को डिजिटल नवाचार की मदद से नई पहचान देने का अभियान शुरू किया गया है। संथाली, हमारे देश के कई राज्यों में रह रहे संथाल जनजातीय समुदाय के लोग बोलते हैं। भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में भी संथाली बोलने वाले आदिवासी समुदाय मौजूद हैं…”

उन्होंने कहा कि, “जब हमारे दृढ़ संकल्प के साथ सामूहिक भागीदारी का संगम होता है तो पूरे समाज के लिए अदभुत नतीजे सामने आते हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण है ‘एक पेड़ मां के नाम’- ये अभियान अदभुत अभियान रहा, जन-भागीदारी का ऐसा उदाहरण वाकई बहुत प्रेरित करने वाला है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर शुरू किए गए इस अभियान में देश के कोने-कोने में लोगों ने कमाल कर दिखाया है…”

वह बोले कि “त्योहारों के इस मौसम में आप फिर से अपना पुराना संकल्प भी जरूर दोहराइए…कुछ भी खरीदेंगे, वो ‘मेड इन इंडिया’ ही होना चाहिए, कुछ भी गिफ्ट देंगे, वो भी ‘मेड इन इंडिया’ ही होना चाहिए…,

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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