मध्य पूर्व तनाव का असर: रुपये में भारी गिरावट, शेयर बाजार भी लुढ़का

नई दिल्ली: बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच रुपया 92 के पार निकल गया। दिन की शुरुआत में रुपया 92.05 पर खुला और कुछ ही देर में गिरकर 92.18 तक पहुंच गया। यह मंगलवार के बंद स्तर 91.49 से करीब 69 पैसे की गिरावट है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है। निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर भी दिखा।
कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। ब्रेंट कच्चा तेल 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। मध्य पूर्व क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण कीमतें बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
डॉलर की मजबूती भी रुपये पर भारी पड़ रही है। अनिश्चितता के समय निवेशक डॉलर को सुरक्षित मानते हैं। इससे भारत जैसे देशों से विदेशी पूंजी बाहर जाती है। डॉलर सूचकांक भी हल्की बढ़त के साथ 99 के आसपास कारोबार करता दिखा।
घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1,671 अंक गिरकर 78,567 पर आ गया, जबकि निफ्टी 502 अंक टूटकर 24,363 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पहले ही बड़े पैमाने पर शेयरों की बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। महंगा तेल घरेलू महंगाई बढ़ा सकता है और चालू खाते के घाटे पर भी असर डाल सकता है। बाजार जानकारों ने सलाह दी है कि निवेशकों को मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल की चाल और डॉलर की मजबूती पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता, महंगा तेल और मजबूत डॉलर मिलकर रुपये की कमजोरी की मुख्य वजह बने हुए हैं।





