डेटा प्राइवेसी बहस के बीच संचार साथी ऐप की अनिवार्यता हटी

केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब इस ऐप को स्मार्टफोन में प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं होगा। मंत्रालय ने एक्स (X) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐप को पहले अनिवार्य किया गया था, लेकिन अब प्री-इंस्टॉलेशन की बाध्यता खत्म कर दी गई है। सरकार ने कहा कि यह ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद केवल ऑनलाइन धोखाधड़ी से लोगों को बचाना है।
इस निर्णय को टेक कंपनी एपल के रुख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को आदेश मिलने के बाद एपल ने संचार साथी ऐप को iPhone में अनिवार्य रूप से जोड़ने से इनकार किया था। कंपनी का कहना था कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। एपल ने अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखने की बात कही थी।
सरकार ने अपने बयान में साफ किया कि यह ऐप “जन भागीदारी” को बढ़ावा देता है और नागरिक किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर खुद को सुरक्षित कर सकते हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि उपयोगकर्ता चाहें तो इस ऐप को कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार अब तक 1.4 करोड़ लोग संचार साथी ऐप डाउनलोड कर चुके हैं और प्रतिदिन करीब 2,000 ऑनलाइन फ्रॉड मामलों की जानकारी इस ऐप के माध्यम से भेजी जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दिन में ही 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में 10 गुना अधिक है। सरकार का कहना है कि इसे अनिवार्य बनाने का उद्देश्य ज्यादा जागरूकता फैलाना था, ताकि तकनीकी ज्ञान कम रखने वाले लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।





