महान मैराथन धावक फौजा सिंह का 114 वर्ष की आयु में निधन

महान मैराथन धावक फौजा सिंह, जिन्हें ‘पगड़ीधारी बवंडर’ के नाम से याद किया जाता है, का सोमवार को 114 वर्ष की आयु में पंजाब के जालंधर जिले में स्थित उनके पैतृक गाँव में एक दुखद सड़क दुर्घटना में निधन हो गया. उम्र को मात देने वाले, रिकॉर्ड तोड़ने वाले और अपने हर कदम से पीढ़ियों को प्रेरित करने वाले व्यक्ति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर फ़ौजा सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्होंने लिखा, फ़ौजा सिंह जी अपने अद्वितीय व्यक्तित्व और फिटनेस जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भारत के युवाओं को प्रेरित करने के अपने तरीके के कारण असाधारण थे. वे अद्भुत दृढ़ संकल्प वाले एक असाधारण एथलीट थे. उनके निधन से बहुत दुःख हुआ. मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और दुनिया भर में उनके अनगिनत प्रशंसकों के साथ हैं.

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस महान मैराथन धावक के निधन पर शोक व्यक्त किया. राज्यपाल ने कहा, “महान मैराथन धावक और दृढ़ता व आशा के चिरस्थायी प्रतीक सरदार फौजा सिंह जी के निधन से गहरा दुख हुआ. 114 वर्ष की आयु में भी, उन्होंने अपनी शक्ति और प्रतिबद्धता से पीढ़ियों को प्रेरित करना जारी रखा. मुझे दिसंबर 2024 में उनके गाँव ब्यास, जिला जालंधर से दो दिवसीय ‘नशा मुक्त – रंगला पंजाब’ मार्च के दौरान उनके साथ चलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. उस समय भी, उनकी उपस्थिति ने इस आंदोलन में अद्वितीय ऊर्जा और उत्साह का संचार किया.”
2011 में टर्बन्ड टोर्नाडो नाम से फौजा सिंह की बायोग्राफी में स्तंभकार खुशवंत सिंह ने किसान परिवार में जन्में फौजा सिंह के जीवन-संघर्षों के बारे में बताया है. 1 अप्रैल, 1911 को जालंधर, पंजाब (जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था) के ब्यास पिंड में जन्मे फौजा सिंह एक किसान परिवार के चार बच्चों में सबसे छोटे थे.
उनका बचपन आसान नहीं था. पतले और कमजोर पैरों के कारण वे 5 साल की उम्र तक चल भी नहीं पाते थे, जिससे लंबी दूरी चलना उनके लिए मुश्किल था. बड़े होकर, उन्होंने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेती करना शुरू किया. 1992 में, अपनी पत्नी जियान कौर के निधन के बाद, वे अपने बेटे के साथ इंग्लैंड चले गए और पूर्वी लंदन में बस गए.
अगस्त 1994 में, अपने पांचवें बेटे कुलदीप को खोने के गहरे दुख से उबरने के लिए फौजा सिंह ने जॉगिंग शुरू की. लेकिन वे साल 2000 तक बहुत सीरियस नहीं थे. 89 साल की उम्र में, उन्होंने दौड़ने को गंभीरता से लेने का फैसला किया. उसी साल, उन्होंने अपनी पहली पूर्ण मैराथन, लंदन मैराथन, 6 घंटे 54 मिनट में पूरी करके सुर्खियां बटोरीं.
वे विश्व रिकॉर्ड हैं जो उन्होंने ओंटारियो मास्टर्स एसोसिएशन इंविटेशनल मीट में तोड़े:
- 100 मीटर: 40 सेकंड (पिछला 29.83)
- 200 मीटर: 23 सेकंड (पिछला 77.59 सेकंड)
- 400 मीटर: 2:13.48 (पिछला 3:41.00)
- 800 मीटर: 5:32.18 (कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं)
- 1,500 मीटर: 11:27.00 (पिछला 16:46.00)
- 1 मील: 11:53.45 (कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं)
- 3,000 मीटर: 24:52.47 (कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं)
- 5,000 मीटर: 49:57.39 (कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं)
16 अक्टूबर, 2011 को, फौजा सिंह मैराथन पूरी करने वाले पहले शताब्दी वर्ष के व्यक्ति बन गए, उन्होंने टोरंटो वाटरफ्रंट मैराथन 8 घंटे, 11 मिनट और 6 सेकंड में पूरी की.





