किश्तवार की त्रासदी: 65 से अधिक मौतें, जन्माष्टमी की खुशियां ठंडी

जम्मू के धार्मिक संगठनों ने शुक्रवार को घोषणा की कि इस साल जन्माष्टमी के उत्सव सीमित रूप से मनाए जाएंगे। इसका कारण किश्तवार जिले के पद्दर क्षेत्र में बादल फटने के बाद चल रहे बचाव और राहत कार्य हैं। घटना में अब तक 65 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अठोली सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में 34 शवों की पहचान हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर के विपक्षी नेता सुनील शर्मा ने बताया कि इन 34 शवों में से सात शव पद्दर के निवासी हैं, जबकि 17 शव उनके परिवारों को अन्य स्थानों पर भेजे गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि बाकी शवों की पहचान का काम जारी है।
बादल फटने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग, एनएचपीसी, सेना, सीआरपीएफ और 108 इमरजेंसी सेवा की 65 एम्बुलेंसों को मौके पर तैनात किया गया है। ये एम्बुलेंस मचैल मंदिर और छोसीटी के बीच 10 किलोमीटर के क्षेत्र में राहत कार्यों में लगी हैं। हालांकि, वहां सड़क न होने के कारण बचाव कार्य धीमा हो गया। किश्तवार के उप-कमिश्नर पंकज कुमार शर्मा ने पद्दर में फंसे लोगों को बचाने और रास्ता खोलने के लिए अधिकारियों को आदेश दिए हैं।
साथ ही, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अठोली सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल और किश्तवार जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों और न्यूरोसर्जनों की टीम को जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेजा गया है। अठोली में 30-बेड वाले एसडीएच में 13 डॉक्टर और 31 पैरामेडिक्स तैनात किए गए हैं।
जिला अस्पताल किश्तवार में भी डॉक्टर तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि टर्शियरी केयर संस्थानों को पूरी तरह तैयार रखा गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पद्दर में राहत और चिकित्सा कार्य की निगरानी कर रहे हैं। आपातकालीन जरूरतों के लिए जम्मू के जीएमसी में 200 यूनिट रक्त भी उपलब्ध कराया गया है।





