कॉमेडी के बादशाह और बॉलीवुड एक्टर सतीश शाह का निधन

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा की हास्य दुनिया को गहरा झटका लगा है. मशहूर अभिनेता और निर्देशक सतीश शाह का मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया. 73 वर्षीय सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और अनोखी अदाकारी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए.
25 जून 1951 को गुजरात के कच्छ जिले में जन्मे सतीश शाह का सपना बचपन से ही फिल्मों की दुनिया में नाम कमाने का था. अभिनय का जुनून उन्हें मुंबई लेकर आया, जहां उन्होंने संघर्षों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई.
सतीश शाह ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1978 में आई फिल्म ‘अजीब दास्तां’ से की थी. हालांकि उन्हें सच्ची पहचान 1983 की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ से मिली.
‘लाश’ बनकर लूट लिया दर्शकों का दिल
‘जाने भी दो यारों’ में सतीश शाह का रोल भले ही छोटा था, लेकिन उसका प्रभाव इतना बड़ा था कि आज भी उनकी अदाकारी उस फिल्म की सबसे यादगार बातों में गिनी जाती है.
कुंदन शाह के निर्देशन में बनी यह डार्क कॉमेडी फिल्म भ्रष्टाचार और सिस्टम पर तीखा व्यंग्य थी. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर, नीना गुप्ता और रवि वासवानी जैसे कलाकार थे, लेकिन “मुर्दा” बने सतीश शाह ने अपनी कुछ झलकियों से ही पूरे सीन पर कब्जा जमा लिया.
उनका किरदार “दियो मर्चेंट” फिल्म की आत्मा बन गया — यह साबित करते हुए कि पर्दे पर जीवंतता अभिनय के समय से नहीं, बल्कि कलाकार की गहराई से आती है.
फिल्म और टीवी दोनों में छोड़ी अमिट छाप
सतीश शाह ने सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि टेलीविज़न पर भी अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने ‘ये जो है जिंदगी’ और ‘सराभाई वर्सेज़ सराभाई’ जैसे शोज़ से घर-घर में लोकप्रियता पाई.
‘सराभाई वर्सेज़ सराभाई’ में उनके किरदार इंद्रवदन सराभाई को आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे आइकॉनिक कॉमिक रोल्स में गिना जाता है.
अभिनेता से बढ़कर एक संस्था
सतीश शाह उन कलाकारों में से थे जिनका हर किरदार दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर कर देता था. कॉमेडी को उन्होंने कभी हल्का नहीं लिया — बल्कि उसे कला के रूप में जिया.





